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जिले में नियंत्रण रेखा पर शांती के चलते ढोल की थाप पर धान की रोपाई करने में जुटे किसान
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पुंछ। डेढ़ वर्षों से नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी बंद होने के कारण चल रही शांति के चलते इन दिनों नियंत्रण रेखा के आसपास के क्षेत्रों के किसान काफी खुश हैं। उन्हें इस बार खेतों में अच्छे से काम करने का मौका मिल रहा है।
नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों में किसान इन दिनों ढोल की थाप पर झूमते नाचते हुए धान की रोपाई कर रहे हैं। इसके चलते नियंत्रण रेखा के आसपास जहां दोे वर्ष पहले हर समय पाकिस्तानी गोलाबारी और मोर्टार के धमाकों की गूंज सुनाई देती थी। वहां इन दिनों सुबह तड़के से देर शाम अंधेरा होने तक ढोल की धुन सुनाई देती है। इसके बीच धान की रोपाई करने वाले किसानों के युवा, बच्चे बीच-बीच में नाचते हुए दिखाई देते हैं। ढोल की थाप पर खेतों में ढोल की थाप पर धान की रोपाई करने वाले नियंत्रण रेखा के खड़ी सेक्टर के गांव गुलपुर, अजोट दिगवार आदि क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि दो वर्ष पहले तक इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से भारी गोलाबारी किए जाने के कारण हम लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। गोलाबारी के चलते हम खेतों में धान फसल नहीं लगा पाते थे, क्योंकि यह खेत पाक सेना की चौकियों के सामने नदी किनारे स्थित हैं। यहां आ जाने पर यहां से भागना भी मुश्किल होता था। यहां छुपने की भी जगह नहीं है। तब हम घरों में ही छुपे रहते थे। इस बार अमन है, तो हम काफी खुश हैं, और ढोल बजा कर धान की फसल लगा रहे हैं। अमन होने के कारण हम लोग मिल कर एक दिन एक के खेतों में तो दूसरे दिन दूसरे के खेताें में रोपाई कर रहे हैं। अगर अमन नहीं होता है तो हर किसी को अपने खेत रोपने की जल्दी होती है, जिसके कारण हर कोई अकेला अपने ही घर के सदस्यों को साथ लेकर खेतों में काम करता है।
इन लोगों का कहना है कि हम चाहते हैं कि इसी तरह नियंत्रण रेखा पर अमन बना रहे, और हम भी आराम से फसल लगाकर परिवार की रोजी रोटी चला सकें। इन किसानों में बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई विभाग के प्रति रोष भी है। उनका कहना है कि इस बार खेतों में पानी कम है। शायद इस तरफ सिंचाई करने वाली नहर कहीं से टूटी हुई है, परंतु फिर भी हम खुश हैं। जल्दी से धान लगा रहे हैं। ताकि बाद में नहर की मरमत का काम भी मिल कर लेंगे। हमारी तो यह दुआ है कि नियंत्रण रेखा पर बस ऐसे ही अमन और शांति का माहौल सदा के लिए बना रहे।
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नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों में किसान इन दिनों ढोल की थाप पर झूमते नाचते हुए धान की रोपाई कर रहे हैं। इसके चलते नियंत्रण रेखा के आसपास जहां दोे वर्ष पहले हर समय पाकिस्तानी गोलाबारी और मोर्टार के धमाकों की गूंज सुनाई देती थी। वहां इन दिनों सुबह तड़के से देर शाम अंधेरा होने तक ढोल की धुन सुनाई देती है। इसके बीच धान की रोपाई करने वाले किसानों के युवा, बच्चे बीच-बीच में नाचते हुए दिखाई देते हैं। ढोल की थाप पर खेतों में ढोल की थाप पर धान की रोपाई करने वाले नियंत्रण रेखा के खड़ी सेक्टर के गांव गुलपुर, अजोट दिगवार आदि क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि दो वर्ष पहले तक इस क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से भारी गोलाबारी किए जाने के कारण हम लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। गोलाबारी के चलते हम खेतों में धान फसल नहीं लगा पाते थे, क्योंकि यह खेत पाक सेना की चौकियों के सामने नदी किनारे स्थित हैं। यहां आ जाने पर यहां से भागना भी मुश्किल होता था। यहां छुपने की भी जगह नहीं है। तब हम घरों में ही छुपे रहते थे। इस बार अमन है, तो हम काफी खुश हैं, और ढोल बजा कर धान की फसल लगा रहे हैं। अमन होने के कारण हम लोग मिल कर एक दिन एक के खेतों में तो दूसरे दिन दूसरे के खेताें में रोपाई कर रहे हैं। अगर अमन नहीं होता है तो हर किसी को अपने खेत रोपने की जल्दी होती है, जिसके कारण हर कोई अकेला अपने ही घर के सदस्यों को साथ लेकर खेतों में काम करता है।
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इन लोगों का कहना है कि हम चाहते हैं कि इसी तरह नियंत्रण रेखा पर अमन बना रहे, और हम भी आराम से फसल लगाकर परिवार की रोजी रोटी चला सकें। इन किसानों में बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई विभाग के प्रति रोष भी है। उनका कहना है कि इस बार खेतों में पानी कम है। शायद इस तरफ सिंचाई करने वाली नहर कहीं से टूटी हुई है, परंतु फिर भी हम खुश हैं। जल्दी से धान लगा रहे हैं। ताकि बाद में नहर की मरमत का काम भी मिल कर लेंगे। हमारी तो यह दुआ है कि नियंत्रण रेखा पर बस ऐसे ही अमन और शांति का माहौल सदा के लिए बना रहे।
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