{"_id":"5a1725194f1c1b6f548bf15e","slug":"101511466265-jammu-and-kashmir-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत के जबड़े में काम करते हैं दमकल कर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौत के जबड़े में काम करते हैं दमकल कर्मी
Updated Fri, 24 Nov 2017 05:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उधमपुर। दमकल विभाग के कार्यालय की इमारत दिन ब दिन और ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। विभाग के कर्मचारी जैसे मौत के जबड़ों के बीच काम कर रहे हैं। इमारत की हालत ऐसी हो चली है कि भूकंप के हल्के झटके में भी वह जमींदोज हो सकती है। अगर हादसे में किसी के जानमाल का नुकसान होता है तो जिम्मेदार कौन होगा?
अगर दूसरों को सुरक्षा देने वाला विभाग खुद ही असुरक्षित हो तो भला दूसरों को सुरक्षा प्रदान कौन करेगा? शहर के बीचोबीच पुरानी जेल में चल रहे दमकल विभाग के कार्यालय तथा गोल मार्केट में विभाग के अधिकारी के कार्यालय की इमारतों की हालत काफी खस्ता हो चली है। जो कभी भी गिरने की कगार पर है। समय-समय पर इन इमारतों के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया गया है, लेकिन अभी इनके सुधार के लिए कुछ भी नहीं किया गया है।
अपनी इमारत नहीं होने के कारण दमकल विभाग का कार्यालय वर्षों से पुरानी जेल की इमारत में चल रहा है। इसी इमारत में दफ्तर भी है और दमकल कर्मचारी का रिहायश भी इसी में है। इसी के अंदर उनका रसोई भी है। ऐसे में अगर किसी तरह का हादसा होता है तो न तो कोई रिकार्ड बचेगा और न ही कर्मचारियों की जान सुरक्षित रह सकती है। इस मुद्दे को कई बार उठाया जा चुका है, लेकिन प्रशासन इसमें गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
विज्ञापन
गोल मार्केट में चल रहे दमकल विभाग के जिला अधिकारी के कार्यालय की इमारत भी असुरक्षित हो गई है। इसकी दशा देख कर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेज बारिश या भूकंप के झटके को इमारत नहीं झेल सकती है। हर वक्त खतरे के साये में वहां के कर्मचारी दिन-रात रहते हैं। इमारतों की खिड़कियां, दरवाजों की हालत खस्ता है। इमारत के कमरों की छत से प्लास्टर उखड़ चुका है। सरिये नजर आ रहे हैं।
इमारत में और भी दफ्तर, बैंक और दुकानें हैं
यह इमारत पीडब्ल्यूडी की है। इसमें ऊपर की मंजिल पर एग्रीकल्चर के सॉयल कंजरवेशन कार्यालय और दमकल विभाग के अधिकारी का कार्यालय है। इमारत के निचले हिस्से में बैंक और दुकानें हैं। यदि प्राकृतिक आपदा के चलते इमारत गिर जाती है तो बड़ा हादसा हो सकता है।
इस बारे में फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। इमारत के हालत के बारे में जानकारी ली जाएगी। उसके बाद उचित पहल की जाएगी। किसी को खतरे में नहीं डाला जा सकता है।
रवींद्र कुमार, डीसी
अगर दूसरों को सुरक्षा देने वाला विभाग खुद ही असुरक्षित हो तो भला दूसरों को सुरक्षा प्रदान कौन करेगा? शहर के बीचोबीच पुरानी जेल में चल रहे दमकल विभाग के कार्यालय तथा गोल मार्केट में विभाग के अधिकारी के कार्यालय की इमारतों की हालत काफी खस्ता हो चली है। जो कभी भी गिरने की कगार पर है। समय-समय पर इन इमारतों के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया गया है, लेकिन अभी इनके सुधार के लिए कुछ भी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
अपनी इमारत नहीं होने के कारण दमकल विभाग का कार्यालय वर्षों से पुरानी जेल की इमारत में चल रहा है। इसी इमारत में दफ्तर भी है और दमकल कर्मचारी का रिहायश भी इसी में है। इसी के अंदर उनका रसोई भी है। ऐसे में अगर किसी तरह का हादसा होता है तो न तो कोई रिकार्ड बचेगा और न ही कर्मचारियों की जान सुरक्षित रह सकती है। इस मुद्दे को कई बार उठाया जा चुका है, लेकिन प्रशासन इसमें गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
विज्ञापन
गोल मार्केट में चल रहे दमकल विभाग के जिला अधिकारी के कार्यालय की इमारत भी असुरक्षित हो गई है। इसकी दशा देख कर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेज बारिश या भूकंप के झटके को इमारत नहीं झेल सकती है। हर वक्त खतरे के साये में वहां के कर्मचारी दिन-रात रहते हैं। इमारतों की खिड़कियां, दरवाजों की हालत खस्ता है। इमारत के कमरों की छत से प्लास्टर उखड़ चुका है। सरिये नजर आ रहे हैं।
इमारत में और भी दफ्तर, बैंक और दुकानें हैं
यह इमारत पीडब्ल्यूडी की है। इसमें ऊपर की मंजिल पर एग्रीकल्चर के सॉयल कंजरवेशन कार्यालय और दमकल विभाग के अधिकारी का कार्यालय है। इमारत के निचले हिस्से में बैंक और दुकानें हैं। यदि प्राकृतिक आपदा के चलते इमारत गिर जाती है तो बड़ा हादसा हो सकता है।
इस बारे में फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। इमारत के हालत के बारे में जानकारी ली जाएगी। उसके बाद उचित पहल की जाएगी। किसी को खतरे में नहीं डाला जा सकता है।
रवींद्र कुमार, डीसी