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क्यों न कार्मिक सचिव को भेज दें जेल-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 10 Aug 2017 08:44 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने वाणिज्यिक कर विभाग में जेसीटीओ से एअीटीओ की पदोन्नति के मामले में अदालती आदेश की पालना नहीं करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कार्मिक सचिव भास्कर ए. सांवत को सात सितंबर को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि क्यों ना अवमानना करने पर उन्हें जेल भेज दिया जाए।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयसिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता सारांश सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का चयन 2005 में जेसीटीओ के पद पर हुआ था, लेकिन सरकार की ओर से देरी के कारण उन्हें मई 2006 में नियुक्ति मिली। वहीं याचिकाकर्ता को वर्ष 2011-12 के एसीटीओ के पद पर यह कहते हुए पदोन्नति नहीं दे गई कि वे पांच साल की अवधि तक जेसीटीओ नहीं थे।
इस पर अदालत ने 28 जुलाई 2016 को याचिकाकर्ता को अनुभव में छूट देते हुए रिव्यू डीपीसी में शामिल करने को कहा। इसके बावजूद कार्मिक विभाग ने यह कहते हुए छूट देने से इनकार कर दिया कि वर्तमान डीपीसी में ही छूट दी जा सकती है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर अदालत ने वाणिज्यिक कर विभाग के निदेशक और कार्मिक सचिव को हाजिर होने के आदेश दिए थे। विभाग के निदेशक ने पेश होकर कहा कि उनकी ओर से अवमानना नहीं की गई है। वहीं कार्मिक सचिव केन्द्र सरकार के आदेश पर अमरनाथ यात्रा पर जाने के कारण पेश नहीं हो सके। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे 7 सितंबर को अदालत में पेश होकर बताए कि क्यों न उन्हें जेल भेज दिया जाए।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयसिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता सारांश सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का चयन 2005 में जेसीटीओ के पद पर हुआ था, लेकिन सरकार की ओर से देरी के कारण उन्हें मई 2006 में नियुक्ति मिली। वहीं याचिकाकर्ता को वर्ष 2011-12 के एसीटीओ के पद पर यह कहते हुए पदोन्नति नहीं दे गई कि वे पांच साल की अवधि तक जेसीटीओ नहीं थे।
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इस पर अदालत ने 28 जुलाई 2016 को याचिकाकर्ता को अनुभव में छूट देते हुए रिव्यू डीपीसी में शामिल करने को कहा। इसके बावजूद कार्मिक विभाग ने यह कहते हुए छूट देने से इनकार कर दिया कि वर्तमान डीपीसी में ही छूट दी जा सकती है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई। इस पर अदालत ने वाणिज्यिक कर विभाग के निदेशक और कार्मिक सचिव को हाजिर होने के आदेश दिए थे। विभाग के निदेशक ने पेश होकर कहा कि उनकी ओर से अवमानना नहीं की गई है। वहीं कार्मिक सचिव केन्द्र सरकार के आदेश पर अमरनाथ यात्रा पर जाने के कारण पेश नहीं हो सके। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे 7 सितंबर को अदालत में पेश होकर बताए कि क्यों न उन्हें जेल भेज दिया जाए।
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