{"_id":"598ead174f1c1b05128b4a8c","slug":"the-cost-of-the-taj-mahal-painting-is-600-million","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक चितेरा जिसने उकेरा 'ताजमहल', कीमत 600 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक चितेरा जिसने उकेरा 'ताजमहल', कीमत 600 करोड़
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:10 PM IST
विज्ञापन
नवीन ने बनाई ताजमहल की अनोखी पेंटिंग
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक पेंटिंग अपनी कीमत और विषय को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। विषय है ताजमहल, पेंटिंग में ताजमहल के पूरे इतिहास और कहानी को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है, वहीं इसकी कीमत करीब 600 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
जयपुर के सीकर रोड पर रहने वाले नवीन शर्मा ने इस पेंटिंग के केंद्र में ताजमहल का रखा है। नवीन की पेंटिंग को लखनऊ में प्रदर्शित किया जा रहा है। इस पेंटिंग की कई खासियतें हैं। इनमें से एक है कि पूरी पेंटिंग में करीब दस हजार ताजमहल मौजूद हैं।
बेहद महीन बने इन ताजमहलों के अलावा पेंटिंग में कुछ दूसरी इमारतों को भी जगह दी गई है। इसके अलावा पेंटिंग में ताजमहल और उससे जुड़ी कई कहानियों को उकेरा गया है। इनमें ताज बनने के सिलसिले, मुमताज को दफनाए जाने, शाहजहां की नजरबंदी और मौत समेत कई नजारे हैं। हांलाकि ये इतने महीन हैं कि इन्हें देखने के लिए लेंस का सराहा लेना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जयपुर के सीकर रोड पर रहने वाले नवीन शर्मा ने इस पेंटिंग के केंद्र में ताजमहल का रखा है। नवीन की पेंटिंग को लखनऊ में प्रदर्शित किया जा रहा है। इस पेंटिंग की कई खासियतें हैं। इनमें से एक है कि पूरी पेंटिंग में करीब दस हजार ताजमहल मौजूद हैं।
विज्ञापन
बेहद महीन बने इन ताजमहलों के अलावा पेंटिंग में कुछ दूसरी इमारतों को भी जगह दी गई है। इसके अलावा पेंटिंग में ताजमहल और उससे जुड़ी कई कहानियों को उकेरा गया है। इनमें ताज बनने के सिलसिले, मुमताज को दफनाए जाने, शाहजहां की नजरबंदी और मौत समेत कई नजारे हैं। हांलाकि ये इतने महीन हैं कि इन्हें देखने के लिए लेंस का सराहा लेना पड़ेगा।
विज्ञापन
चार साल तक करते रहे काम
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
इस पेंटिंग को बनाने में नवीन को चार साल लग गए। लगातार चार साल तक वे एक ही पेंटिंग पर काम करते रहे। दरअसल नवीन ने कई साल पहले ताजमहल को देखा, तब तय किया कि एक अनोखी पेंटिंग बनाएंगे, जो बेहद अलग हो। साल 2006 में इस पर काम शुरू किया और चार साल में जाकर यह पेंटिंग पूरी हो पाई।
अब जहां तक बात इतनी महंगी पेंटिंग को बेचने की है। माना जा रहा है कि भारत में इस पेंटिंग के लिए खरीदार मिलना मुश्किल है। ऐसे में वे सऊदी अरब में इसे बेचने की बात कर रहे हैं। इससे पहले ऑनलाइन बिक्री के दौरान पेंटिंग की कीमत 600 करोड़ लगा दी गई थी।
अब जहां तक बात इतनी महंगी पेंटिंग को बेचने की है। माना जा रहा है कि भारत में इस पेंटिंग के लिए खरीदार मिलना मुश्किल है। ऐसे में वे सऊदी अरब में इसे बेचने की बात कर रहे हैं। इससे पहले ऑनलाइन बिक्री के दौरान पेंटिंग की कीमत 600 करोड़ लगा दी गई थी।