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Parent's जान लें, बच्चे को स्कूल ले जाने वाली Bus के नियम कायदे
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 18 Sep 2017 08:50 PM IST
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राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल बसों को लेकर मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला कलक्टरों सहित अन्य संबंधित विभाग के आलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश केएस झवेरी की ओर से संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि बालवाहिनी के काम आने वाले हर वाहन का रंग पीला होना चाहिए। इसके अलावा उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो। वाहन पर संबंधित स्कूल के साथ-साथ चालक और परिचालक की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा वाहन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए। साथ ही, वाहन की गति चालीस किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल प्रबंधन की ओर से संचालित सभी बालवाहिनी में जीपीएस सिस्टम के साथ फर्स्टएड और पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं, शीशे पर किसी तरह की फिल्म चढ़ी हुई नहीं होनी चाहिए।
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प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश केएस झवेरी की ओर से संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि बालवाहिनी के काम आने वाले हर वाहन का रंग पीला होना चाहिए। इसके अलावा उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो। वाहन पर संबंधित स्कूल के साथ-साथ चालक और परिचालक की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा वाहन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए। साथ ही, वाहन की गति चालीस किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल प्रबंधन की ओर से संचालित सभी बालवाहिनी में जीपीएस सिस्टम के साथ फर्स्टएड और पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं, शीशे पर किसी तरह की फिल्म चढ़ी हुई नहीं होनी चाहिए।
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...तो नहीं दी जाए वाहन चलाने की अनुमति
file photo
- फोटो : अमर उजाला
प्राधिकरण की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि दिव्यांग बच्चों के लिए सीट आरक्षित होने के साथ ही संबंधित वाहन चालक-परिचालक के संपूर्ण जानकारी व लाईसेंस की कॉपी स्कूल प्रबंधन, ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय थाने व परिवहन विभाग के पास होनी चाहिए।
प्राधिकरण ने वाहन चालक की नियुक्ति की शर्ते तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि चालक के पास भारी वाहन चलाने का पांच साल का अनुभव होना चाहिए। यदि ऐसे व्यक्ति का एक साल में दो बार से अधिक चालान पेश हो चुका है तो उसे बालवाहिनी चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे हर वाहन में परिचालक नियुक्त होना चाहिए। प्राधिकरण ने संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय की है कि बाल वाहिनी को नियमानुसार संचालित करवाएं।
निर्धारित समयावधि में वाहन की फिटनेस और चालक का मेडिकल परीक्षण कराया जाए। वाहन की सीट क्षमता के डेढ़ गुणा से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए, लेकिन यदि बच्चा 12 साल से बड़ा है तो उसकी गणना एक पूरी सीट के लिए की जाए।
प्राधिकरण ने वाहन चालक की नियुक्ति की शर्ते तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि चालक के पास भारी वाहन चलाने का पांच साल का अनुभव होना चाहिए। यदि ऐसे व्यक्ति का एक साल में दो बार से अधिक चालान पेश हो चुका है तो उसे बालवाहिनी चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे हर वाहन में परिचालक नियुक्त होना चाहिए। प्राधिकरण ने संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय की है कि बाल वाहिनी को नियमानुसार संचालित करवाएं।
निर्धारित समयावधि में वाहन की फिटनेस और चालक का मेडिकल परीक्षण कराया जाए। वाहन की सीट क्षमता के डेढ़ गुणा से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए, लेकिन यदि बच्चा 12 साल से बड़ा है तो उसकी गणना एक पूरी सीट के लिए की जाए।