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राजमहल पैलेस मामला, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 04 Apr 2017 06:02 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : court
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राजस्थान के बहुचर्चित राजमहल पैलेस मामले में हाईकोर्ट ने याचिका पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में हाइकोर्ट में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश मनीष भंडारी ने ये आदेश एसएमएस इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन की याचिका पर दिए।
गौरतलब है कि जयपुर पूर्व राजघराने के स्वामित्व वाले होटल राजमहल पैलेस को राजस्थान सरकार ने सील करवा दिया था। जेडीए ने कार्रवाई कर इस पांच सितारा होटल से सभी लोगों को बाहर निकालते हुए तोड़फोड़ की थी। तब इस कार्रवाई के कई राजनीतिक मायने भी निकाले गए थे। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सवाई माधोपुर से विधायक व पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी के बीच संबंधों में तल्खी आ गई थी। जिसके बाद सीएम के ईशारे पर यह कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई जब की गई, उससे एक दिन पहले ही सीएम राजे भूटान के लिए रवाना हो गई थी।
होटल को सील करने का घटनाक्रम बड़े नाटकीय ढंग से चला। सुबह अवैध निर्माण तोड़ने पहुंचे जेडीए के अधिकारियों से दीया कुमारी की झड़प भी हुई। दीया कुमारी की बात अधिकारियों ने नहीं सुनी और तोड़फोड़ की कार्रवाई चलती रही। बाद में दीया कुमारी ने अधिकारियों को खरी खोटी भी सुनाई। तब भाजपा विधायक दीया कुमारी ने अपनी ही सरकार पर इस जमीन पर मॉल बनवाने की मंशा रखने का आरोप भी लगाया था।
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इस घटना के बाद पूर्व राजपरिवार ने बाकायदा अखबारों में विज्ञापन छपवा कर इसे पूर्व राजपरिवार के साथ ही जनता की लड़ाई बताया। सिटी पैलेस, त्रिपोलिया गेट से आक्रोश रैली भी निकाली गई। जिसमें राजपूत समाज ने बढ़चढ़कर भाग लिया। मामले में केंद्र की भाजपा सरकार के दखल की चर्चाएं भी जोरों पर चलीं। रैली के बाद एक आश्वासन मात्र से पूरा आंदोलन खत्म कर दिया गया।
जहां तक बात राजमहल पैलेस की है। बताया जाता है कि राजमहल पैलेस को 1729 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनाया था। राजस्थान सरकार ने इस पैलेस के आस-पास की जमीन को कब्जे में लेने का फैसला किया। 1993 में सरकार ने अवाप्ति के तहत पैलेस के बाहर की 12 बीघा जमीन पर कब्जा कर मुआवजा राजपरिवार के खाते में जमा करवा दिया। जिसे राजपरिवार ने लेने से मना कर दिया।
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गौरतलब है कि जयपुर पूर्व राजघराने के स्वामित्व वाले होटल राजमहल पैलेस को राजस्थान सरकार ने सील करवा दिया था। जेडीए ने कार्रवाई कर इस पांच सितारा होटल से सभी लोगों को बाहर निकालते हुए तोड़फोड़ की थी। तब इस कार्रवाई के कई राजनीतिक मायने भी निकाले गए थे। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सवाई माधोपुर से विधायक व पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी के बीच संबंधों में तल्खी आ गई थी। जिसके बाद सीएम के ईशारे पर यह कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई जब की गई, उससे एक दिन पहले ही सीएम राजे भूटान के लिए रवाना हो गई थी।
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होटल को सील करने का घटनाक्रम बड़े नाटकीय ढंग से चला। सुबह अवैध निर्माण तोड़ने पहुंचे जेडीए के अधिकारियों से दीया कुमारी की झड़प भी हुई। दीया कुमारी की बात अधिकारियों ने नहीं सुनी और तोड़फोड़ की कार्रवाई चलती रही। बाद में दीया कुमारी ने अधिकारियों को खरी खोटी भी सुनाई। तब भाजपा विधायक दीया कुमारी ने अपनी ही सरकार पर इस जमीन पर मॉल बनवाने की मंशा रखने का आरोप भी लगाया था।
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इस घटना के बाद पूर्व राजपरिवार ने बाकायदा अखबारों में विज्ञापन छपवा कर इसे पूर्व राजपरिवार के साथ ही जनता की लड़ाई बताया। सिटी पैलेस, त्रिपोलिया गेट से आक्रोश रैली भी निकाली गई। जिसमें राजपूत समाज ने बढ़चढ़कर भाग लिया। मामले में केंद्र की भाजपा सरकार के दखल की चर्चाएं भी जोरों पर चलीं। रैली के बाद एक आश्वासन मात्र से पूरा आंदोलन खत्म कर दिया गया।
जहां तक बात राजमहल पैलेस की है। बताया जाता है कि राजमहल पैलेस को 1729 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनाया था। राजस्थान सरकार ने इस पैलेस के आस-पास की जमीन को कब्जे में लेने का फैसला किया। 1993 में सरकार ने अवाप्ति के तहत पैलेस के बाहर की 12 बीघा जमीन पर कब्जा कर मुआवजा राजपरिवार के खाते में जमा करवा दिया। जिसे राजपरिवार ने लेने से मना कर दिया।