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जिसके शावकों का नामकरण सीएम राजे ने किया, वो 'मां' अब नहीं रही
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 16 Jan 2018 06:39 PM IST
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शावकों के साथ तेजिका
- फोटो : फाइल फोटो
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तीन शावकों को जन्म देने वाली शेरनी ने कल रात अंतिम सांसे ली।
मामला जयपुर के नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर की शेरनी तेजिका से जुड़ा है। तेजिका की पिछले कुछ दिनों से तबीयत नासाज ही चल रही थी। कल रात तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। तेजिका अपने पीछे तीन शावक छोड़ गई है। इन तीनों शावकों को नाम खुद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिया था।
एक कार्यक्रम में राजे ने दो नर शावकों का नाम तेजस और त्रिपुर और मादा शावक का नाम तारा रखा था। बांसवाड़ा स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी के नाम पर ही एक शावक त्रिपुर का नाम रखा गया था। सीएम ने खुद इस बात को कहा है। राजे की त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में आस्था है। वे इस मंदिर में कई बार पूजा अर्चना व अनुष्ठान भी करवा चुकी हैं।
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मामला जयपुर के नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर की शेरनी तेजिका से जुड़ा है। तेजिका की पिछले कुछ दिनों से तबीयत नासाज ही चल रही थी। कल रात तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। तेजिका अपने पीछे तीन शावक छोड़ गई है। इन तीनों शावकों को नाम खुद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिया था।
एक कार्यक्रम में राजे ने दो नर शावकों का नाम तेजस और त्रिपुर और मादा शावक का नाम तारा रखा था। बांसवाड़ा स्थित मां त्रिपुरा सुंदरी के नाम पर ही एक शावक त्रिपुर का नाम रखा गया था। सीएम ने खुद इस बात को कहा है। राजे की त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में आस्था है। वे इस मंदिर में कई बार पूजा अर्चना व अनुष्ठान भी करवा चुकी हैं।
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आठ महीने के हैं तेजिका के शावक
शेरनी तेजिका
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, गुजरात से लाई गई शेर सिद्धार्थ व शेरनी तेजिका के पांच शावक हुए। तेजिका ने 20 व 21 मई की रात में शाम 6:51 बजे, रात 9:26 पर और रात 12:04 मिनट पर तीन शावकों को जन्म दिया। इसके करीब चौबीस घंटे बाद 22 मई को सुबह 3.10 मिनट पर दो और शावकों को जन्म दिया।
चौबीस घंटे बाद पैदा हुए दो शावकों में से एक मृत पैदा हुआ था और दूसरा कमजोर था। जिसने दो दिन बाद दम तोड़ दिया। रेस्क्यू सेंटर में तीन शावकों के आने की खुशियां मनाई गई। इसके बाद तेजिका ने अपने शावकों को जिंदगी के सबक सीखाने भी शुरू किए। शावकों की चहलकदमी से रेस्क्यू सेंटर आबाद होने लगा था।
चौबीस घंटे बाद पैदा हुए दो शावकों में से एक मृत पैदा हुआ था और दूसरा कमजोर था। जिसने दो दिन बाद दम तोड़ दिया। रेस्क्यू सेंटर में तीन शावकों के आने की खुशियां मनाई गई। इसके बाद तेजिका ने अपने शावकों को जिंदगी के सबक सीखाने भी शुरू किए। शावकों की चहलकदमी से रेस्क्यू सेंटर आबाद होने लगा था।