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बंदर का अंतिम संस्कार, वो भी विद्युत शव दाह गृह से, अस्थियां भी की प्रवाहित
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 25 Dec 2017 06:25 PM IST
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बंदर का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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एक बंदर की मौत को लोगों की भावनाओं ने बेहद खास बना दिया। बंदर का विद्युत शव दाह गृह से अंतिम संस्कार किया गया और नदी में उसकी अस्थियां प्रवाहित की गई।
कोटा शहर के मकबरा क्षेत्र में प्राचीन मंदिर के पास कचरे के ढेर में सोमवार सुबह एक बंदर मृत मिला। स्थानीय निवासी रवि डाबी ने इसकी सूचना ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण फाउंडेशन के पदाधिकारियों को दी। तुरंत फाउंडेशन के हरीश राठौड़, तेजकरण अंची, त्रिलोक जैन, योगेश सोनी, शैलेंद्र मेहरा, हेमंत राव, राजा शर्मा आदि मौके पर पहुंचे और बंदर को कचरे से बाहर निकाला।
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कोटा शहर के मकबरा क्षेत्र में प्राचीन मंदिर के पास कचरे के ढेर में सोमवार सुबह एक बंदर मृत मिला। स्थानीय निवासी रवि डाबी ने इसकी सूचना ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण फाउंडेशन के पदाधिकारियों को दी। तुरंत फाउंडेशन के हरीश राठौड़, तेजकरण अंची, त्रिलोक जैन, योगेश सोनी, शैलेंद्र मेहरा, हेमंत राव, राजा शर्मा आदि मौके पर पहुंचे और बंदर को कचरे से बाहर निकाला।
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विधि विधान से हुई पूरी क्रिया
Monkey Feeding
पूछताछ पर लोगों ने बताया कि संभवत: करंट से बंदर की मौत हुई है। इसके बाद फाउंडेशन सदस्य बंदर को लेकर किशोरपुरा मुक्तिधाम पहुंचे, यहां पर विधि-विधान से बंदर के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया विद्युत शवदाह गृह में की गई।
शवदाह गृह के संचालक ओम प्रकाश ने बताया कि कोटा के इस पहले विद्युत शवदाह गृह में बंदर के अंतिम संस्कार का यह पहला मामला है। इस मौके पर फाउंडेशन अध्यक्ष कमल सिंह यदुवंशी सहित बड़ी संख्या में हिंदू संगठन से जुड़े लोग मौजूद थे। चंबल नदी में अस्थियां विसर्जित की गई।
शवदाह गृह के संचालक ओम प्रकाश ने बताया कि कोटा के इस पहले विद्युत शवदाह गृह में बंदर के अंतिम संस्कार का यह पहला मामला है। इस मौके पर फाउंडेशन अध्यक्ष कमल सिंह यदुवंशी सहित बड़ी संख्या में हिंदू संगठन से जुड़े लोग मौजूद थे। चंबल नदी में अस्थियां विसर्जित की गई।