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चार साल से अस्थियां लिए पूछता फिर रहा है ये पिता, कौन है मेरी मासूम बच्ची का कातिल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 05 Jan 2018 02:41 PM IST
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चंचल की अस्थियों के साथ परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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चार साल से एक पिता अपनी मासूम बच्ची की अस्थियां लिए एक सवाल उठाए जा रहा है, लेकिन उसे अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
चाइनीज मांझे का शिकार बनी मासूम चंचल की चहक अब भी घर के आंगन में परिजनों को महसूस होती है। दरअसल करीब चार साल पहले जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित वेंकटेश मंदिर के पुजारी प्रमोद दाधीच की बच्ची के साथ ये वाकया हुआ।
छह साल की बच्ची चंचल अपने पिता के साथ जा रही थी। चंचल को नहीं पता था कि कुछ ही दूरी पर मौत उसका इंतजार कर रही है। एकाएक धारदार मांझा आया और बच्ची का गला काट गया। पिता की आंखों के सामने बच्ची तड़पती रही और उसने दम तोड़ दिया।
अपनी बेटी को आंखों को सामने दम तोड़ता देख बेबस पिता की हिम्मत भी जवाब दे गई। इस वाकये को चार साल गुजर गए हैं।
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चाइनीज मांझे का शिकार बनी मासूम चंचल की चहक अब भी घर के आंगन में परिजनों को महसूस होती है। दरअसल करीब चार साल पहले जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित वेंकटेश मंदिर के पुजारी प्रमोद दाधीच की बच्ची के साथ ये वाकया हुआ।
छह साल की बच्ची चंचल अपने पिता के साथ जा रही थी। चंचल को नहीं पता था कि कुछ ही दूरी पर मौत उसका इंतजार कर रही है। एकाएक धारदार मांझा आया और बच्ची का गला काट गया। पिता की आंखों के सामने बच्ची तड़पती रही और उसने दम तोड़ दिया।
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अपनी बेटी को आंखों को सामने दम तोड़ता देख बेबस पिता की हिम्मत भी जवाब दे गई। इस वाकये को चार साल गुजर गए हैं।
बेबस पिता ने काटे दफ्तरों के कई चक्कर, अब शिवर में अस्थियां
मासूम चंचल
- फोटो : अमर उजाला
चंचल की चिता की आग अब तक पिता के सीने में धधक रही है। प्रमोद ने अपनी बिटिया की मौत पर प्रण लिया कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती तब तक वे चंचल की अस्थियां विसर्जित नहीं करेंगे।
अपनी बिटिया की मौत के दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रमोद अधिकारियों से मिल चुके हैं, गुहार भी लगा चुका है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। शहर में चाइनीज मांझे की बिक्री और उड़ाने पर रोक है, बावजूद इसके दबे छिपे बिक्री होती ही है। यही वजह है कि कल भी एक युवक चाइनीज धारदार मांझे की भेंट चढ़ गया।
चार साल से चंचल की अस्थियां जवाहर सर्किल पर कल्पतरु संस्थान की ओर से लगाए जाने वाले कैम्प में रखी जाती है। जहां लोग पक्षियों को बचाने के लिए जुटते हैं।
अपनी बिटिया की मौत के दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रमोद अधिकारियों से मिल चुके हैं, गुहार भी लगा चुका है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। शहर में चाइनीज मांझे की बिक्री और उड़ाने पर रोक है, बावजूद इसके दबे छिपे बिक्री होती ही है। यही वजह है कि कल भी एक युवक चाइनीज धारदार मांझे की भेंट चढ़ गया।
चार साल से चंचल की अस्थियां जवाहर सर्किल पर कल्पतरु संस्थान की ओर से लगाए जाने वाले कैम्प में रखी जाती है। जहां लोग पक्षियों को बचाने के लिए जुटते हैं।