फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan high court Order to immediately release the prisoner, intent to act on the officers

कैदी को तत्काल रिहा करने के आदेश, अफसरों पर कार्रवाई की जताई मंशा

Thu, 04 Jan 2018 07:08 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Thu, 04 Jan 2018 07:08 PM IST
विज्ञापन
Rajasthan high court Order to immediately release the prisoner, intent to act on the officers
राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा पूरी होने के बावजूद कैदी को दस माह तक रिहा नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत में उपस्थित जेल डीजी को आदेश जारी कर कैदी को तत्काल रिहा करने को कहा है। अदालत ने दोषी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की मंशा भी जताई है।
विज्ञापन


इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह राज्य सरकार से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए अलग से याचिका दायर कर सकता है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।
विज्ञापन


 सुनवाई के दौरान जेल डीजी अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आरोपी की सभी सजाओं को साथ चलाने के गत 8 मार्च के आदेश के बाद कैदी की सजाओं को साथ चलाया गया। इसके अलावा उसे रिहा करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कैदी को अवैध हिरासत में रखा गया

Rajasthan high court Order to immediately release the prisoner, intent to act on the officers
इस पर अदालत ने कहा कि आठ मार्च का आदेश सजा के मूल आदेश से लागू किया जाना चाहिए था। कैदी को दस माह से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया है। इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने कैदी को तत्काल रिहा करने के आदेश देते हुए दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मंशा जताई है।

याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता चेक अनादरण के छह मामलों में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने गत 8 मार्च को आदेश जारी कर पांच मामलों की सजा एक साथ भुगतने के निर्देश दिए थे। जबकि एक मामले की सजा पूरी हो चुकी है।

याचिका में कहा गया कि सभी मामलों की सजा साथ-साथ चलने के कारण याचिकाकर्ता के पिता को मार्च 2017 में रिहा हो जाना चाहिए था। इसके बावजूद भी उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जेल डीजी को पेश होने के आदेश दिए थे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed