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सोशल मीडिया का यूज इन्हें पड़ सकता है भारी, सरकार ने की ये तैयारी...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 13 Oct 2017 12:00 PM IST
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फाइल फोटो।
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सोशल मीडिया के माध्यम से अपने ही महकमे की बात जगजाहिर करने वालों पर अब नकेल कसेगी।
दरअसल राजस्थान के कार्मिक विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि जो अधिकारी कर्मचारी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं और विभाग की बातों को सोशल मीडिया पर प्रचारित करते हैं, तो उन्हें सख्त कार्रवाई से गुजरना होगा।
सर्कुलर के अनुसार दोषियों को सीधे चार्जशीट थमा दी जाएगी। राजस्थान के कार्मिक विभाग के सचिव भास्कर सावंत की ओर से यह सर्कुलर जारी किया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि कोई भी अधिकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर व्यक्ति विशेष, किसी पार्टी अथवा संस्थान के खिलाफ निराधान व गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी नहीं करेंगे। जिससे की सबंधित व्यक्ति या कार्यालय की छवि खराब हो।
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दरअसल राजस्थान के कार्मिक विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि जो अधिकारी कर्मचारी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं और विभाग की बातों को सोशल मीडिया पर प्रचारित करते हैं, तो उन्हें सख्त कार्रवाई से गुजरना होगा।
सर्कुलर के अनुसार दोषियों को सीधे चार्जशीट थमा दी जाएगी। राजस्थान के कार्मिक विभाग के सचिव भास्कर सावंत की ओर से यह सर्कुलर जारी किया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि कोई भी अधिकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर व्यक्ति विशेष, किसी पार्टी अथवा संस्थान के खिलाफ निराधान व गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी नहीं करेंगे। जिससे की सबंधित व्यक्ति या कार्यालय की छवि खराब हो।
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अधिकारियों के खिलाफ सख्ती
फाइल फोटो।
सर्कुलर के अनुसार यदि अधिकारी दोषी मिला तो सीधे उसे चार्जशीट देकर निलंबन तक की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय सेवा आचार नियम 1968 के नियत तीन और सात और राजस्थान सिविल सेवा आचार नियम 1971 के नियम तीन, चार और 11 में यह प्रावधान पहले से है। लेकिन कार्मिक विभाग का कहना है कि कुछ अधिकारी इसकी लगातार अनदेखी कर रहे।
वहीं कई प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है इस वर्ष होने वाले तीन उपचुनाव व आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इस तरह का कदम उठाया है।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय सेवा आचार नियम 1968 के नियत तीन और सात और राजस्थान सिविल सेवा आचार नियम 1971 के नियम तीन, चार और 11 में यह प्रावधान पहले से है। लेकिन कार्मिक विभाग का कहना है कि कुछ अधिकारी इसकी लगातार अनदेखी कर रहे।
वहीं कई प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है इस वर्ष होने वाले तीन उपचुनाव व आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इस तरह का कदम उठाया है।