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ड्यूटी पर नहीं लौटने वाले डॉक्टर्स को सजा दिलवाने के लिए सरकार उठाने जा रही है यह कदम
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 23 Dec 2017 09:42 PM IST
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एक सरकारी अस्पताल में खाली पड़ा डॉक्टर का चेंबर और बाहर लाइन में लगे मरीज
- फोटो : Amar Ujala
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राजस्थान में सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर गतिरोध अभी भी जारी है। सरकार इस मामले में सख्त रवैया अपनानते हुए काम पर नहीं लौटने वाले चिकित्सकों को सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश करने की तैयारी कर रही हैं। उधर, चिकित्सकों ने 25 को महाबंद का आह्वान किया है।
राज्य सरकार की ओर से डॉक्टर्स को कल बातचीत के लिए भी बुलाया है। सरकार की ओर से दोपहर दो बजे बातचीत के लिए बुलाया है। हालांकि अभी तक हड़ताली डॉक्टर्स की ओर से अभी इस बारे में सहमति नहीं मिली।
पिछली हड़ताल के दौरान हुए समझौते को लागू नहीं किए जाने को लेकर राजस्थान में सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर है। इस मामले में हाईकोर्ट तक भी दखल कर चुका है। अब राज्य सरकार की ओर से हड़ताली चिकित्सकों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की गुहार करते हुए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया जाएगा।
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प्रार्थना पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर उसकी एडवांस कॉपी याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा को भेजी गई है। चिकित्सकों की ओर से 25 दिसंबर को महाबंद की घोषणा के बाद याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा ने शनिवार को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश कर लंबित अवमानना प्रार्थना पत्र की जल्द सुनवाई करने की गुहार की है। जिस पर संभवत: रविवार को सुनवाई हो सकती है।
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राज्य सरकार की ओर से डॉक्टर्स को कल बातचीत के लिए भी बुलाया है। सरकार की ओर से दोपहर दो बजे बातचीत के लिए बुलाया है। हालांकि अभी तक हड़ताली डॉक्टर्स की ओर से अभी इस बारे में सहमति नहीं मिली।
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पिछली हड़ताल के दौरान हुए समझौते को लागू नहीं किए जाने को लेकर राजस्थान में सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर है। इस मामले में हाईकोर्ट तक भी दखल कर चुका है। अब राज्य सरकार की ओर से हड़ताली चिकित्सकों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की गुहार करते हुए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया जाएगा।
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प्रार्थना पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर उसकी एडवांस कॉपी याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा को भेजी गई है। चिकित्सकों की ओर से 25 दिसंबर को महाबंद की घोषणा के बाद याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा ने शनिवार को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश कर लंबित अवमानना प्रार्थना पत्र की जल्द सुनवाई करने की गुहार की है। जिस पर संभवत: रविवार को सुनवाई हो सकती है।
यह कहा गया है प्रार्थना पत्र में
हड़ताल समाप्त होने की उम्मीद में डॉक्टर के रूम के बाहर बैठे मरीज और उनके परिजन
- फोटो : Amar Ujala
राज्य सरकार की ओर से प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि अजय चौधरी व दुर्गाशंकर दूसरे डॉक्टर्स को हड़ताल को जारी रखने के लिए उकसा रहे हैं। अदालती आदेश की पालना में राज्य सरकार की ओर से डॉक्टर्स को काम पर लौटने के लिए आम सूचना जारी की गई। इसके अलावा जिला कलक्टर्स को भी निर्देश दिए गए।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि गत माह भी चिकित्सकों ने हडताल की थी। इसके बाद उनकी 18 मांगों में से 13 मांगे मानी गई और शेष प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद भी उन्होंने फिर हडताल कर दी। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि दोनों डॉक्टर नेता न सिर्फ अदालती आदेश की अवमानना के दोषी हैं, बल्कि सरकार की ओर से की जा रही पालना में भी बाधा बन रहे हैं। वहीं याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा की ओर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया कि अजय चौधरी सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर डॉक्टर्स को काम पर न लौटने की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा 25 दिसंबर को महाबंद का एलान भी किया गया है। वहीं गत सात दिनों में 52 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में आमजन को चिकित्सकों की दया पर नहीं छोडा जा सकता। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि अदालत में लंबित अवमानना प्रार्थना पत्र पर जल्दी ही सुनवाई की जाए। महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने बताया कि प्रार्थना पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे जल्दी ही मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि गत माह भी चिकित्सकों ने हडताल की थी। इसके बाद उनकी 18 मांगों में से 13 मांगे मानी गई और शेष प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद भी उन्होंने फिर हडताल कर दी। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि दोनों डॉक्टर नेता न सिर्फ अदालती आदेश की अवमानना के दोषी हैं, बल्कि सरकार की ओर से की जा रही पालना में भी बाधा बन रहे हैं। वहीं याचिकाकर्ता अभिनव शर्मा की ओर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया कि अजय चौधरी सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर डॉक्टर्स को काम पर न लौटने की अपील कर रहे हैं। इसके अलावा 25 दिसंबर को महाबंद का एलान भी किया गया है। वहीं गत सात दिनों में 52 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में आमजन को चिकित्सकों की दया पर नहीं छोडा जा सकता। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि अदालत में लंबित अवमानना प्रार्थना पत्र पर जल्दी ही सुनवाई की जाए। महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने बताया कि प्रार्थना पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे जल्दी ही मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा।