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Rajasthan: CM गहलोत बोले- कर्मचारियों को पेंशन नहीं देंगे तो करप्शन करेंगे, 35 साल तक सोचेगा- पैसा कैसे कमाऊं

Sat, 07 Jan 2023 06:17 PM IST
नीरज शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: नीरज शर्मा Updated Sat, 07 Jan 2023 06:17 PM IST
सार

राजस्थान सीएम गहलोत ने ओल्ड पेंशन स्कीम का पक्ष रखते हुए कहा-अगर कर्मचारियों को पेंशन नहीं देंगे, तो वह करप्शन करेंगे। 35 साल कर्मचारी सोचेगा मैं पैसे कैसे कमाऊं, जिससे मेरा बुढ़ापा ठीक निकले।
 

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Politics: Rajasthan Cm Ashok Gehlot said- Government Employees will do corruption withcout OPS pension
सीएम अशोक गहलोत ने कहा-कर्मचारियों को पेंशन हीं देंगे तो करप्शन करेंगे। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया की ओर से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को दिवालिएपन की रेसिपी और बेहुदगी भरा फैसला बताने पर पलटवार किया। जयपुर में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए गहलोत बोले- हमने ओपीएस पब्लिक इंट्रैस्ट में लागू किया। उन्होंने पूछा- अगर सरकारी कर्मचारी करप्शन करेंगे, तो अच्छा लगेगा क्या ? अगर कर्मचारी को पेंशन नहीं देंगे, तो 35 साल तक वह सोचेगा कि मैं पैसे कैसे कमाऊँ। जिससे मेरा बुढ़ापा ठीक निकले। मानवीय दृष्टिकोण भी है कि वह तकलीफ में रहेगा। टेंशन में काम करेगा। गुड गवर्नेंस में पूरी तरह भागीदारी नहीं निभा पाएगा, ऐसा मेरा मानना है। 
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केंद्र का भेदभाव- आर्मी को ओपीएस, पैरामिलिट्री को नहीं

गहलोत ने कहा-केंद्र सरकार ने भेदभाव किया है। आर्मी को ओपीएस और बीएसएफ को ओपीएस नहीं दी। इंडो-तिब्बतियन पुलिस को ओपीएस नहीं रखी। पैरा मिलिट्री फोर्सेज को ओपीएस नहीं, एनपीएस है। ये भेदभाव क्यों किया ? इसका जवाब दें। 
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राजस्थान में ओपीएस इसलिए

सीएम गहलोत ने कहा- हमारी सरकार ने वित्तीय प्रबंधन किया है। कोई काम ऐसा नहीं है, जो हो नहीं सकता है। राज्य कर्मचारी के लिए 60 साल तक ओपीएस लागू करके और पेंशन देकर भी विकास कर सकता है। गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा- क्या एक इंसान को, एक कर्मचारी, जो नौकरी कर रहा है, उसे बुढ़ापे में सिक्योरिटी  महसूस करने का अधिकार नहीं है ? वो समझ के परे है। क्यों ह्यूमन राइट कमीशन बोल रहा है कि इनके साथ अन्याय हो रहा है। बुढ़ापे में कर्मचारियों का क्या होगा ? जबकि उनके लिए बना कमीशन कह रहा है कि हम लागू नहीं करेंगे। इसका जवाब भी आलोचना करने वालों को देना चाहिए। गहलोत ने कहा- 35 साल की सेवा करने के बाद कई घरों में परिस्थितियां और तकलीफ आती हैं। बुढ़ापे में रिटायर्ड व्यक्ति सोचें कि अब हम कहां जाएंगे। पेंशन भी नहीं आ रही है। इसलिए हमने ओपीएस पब्लिक इंट्रैस्ट में किया। 
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एसीबी आदेश से यू-टर्न जैसी बात नहीं

एसीबी का आरोपी की पहचान छिपाने वाले आदेश को वापस लेने के फैसले पर गहलोत ने कहा- इसमें यू-टर्न जैसी कोई बात नहीं है। मैंने खुदने उदयपुर में कहा था कि इसे दिखवा देंगे। मुझे बताया गया था कि तीन जजों की बेंच का एक फैसला था, उसके कारण आदेश निकाला गया।  लेकिन मैंने खुदने कहा कि उस आदेश को वापस ले लेंगे। सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली बीजेपी सरकार ने कानून पास करके और ऑर्डिनेंस पास करके कहा था कि मीडिया छाप नहीं पाएगा। उसमें और इस आदेश में फर्क था। इसलिए अखबारों ने पिछली सरकार के खिलाफ अभियान चलाया। इस बार मैंने खुदने कहा कहीं अड़चन वाली बात है, तो मैं इसे विदड्रॉ करवा दूंगा और कल आदेश विदड्रॉ हो ही गया है।

हमें विपक्ष से शिकायत है

गहलोत ने कहा- हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है। हमें विपक्ष से शिकायत है। वह ज्यादा छापे डालने पर कहते हैं कि बहुत करप्शन है। जिन राज्यों में छापे नहीं डाले जातें, क्या वहां करप्शन है ही नहीं ? इसका मतलब तो यही हुआ। लेकिन हमारी पॉलिसी छापे डालने की है। उसकी तारीफ करने की बजाय विपक्ष के नेता आलोचना करते हैं। मैंने राजस्थान में एफआईआर कंपलसरी कर दी। देश में राजस्थान ऐसा पहला राज्य है। पहले आधे लोग तो सुनवाई के लिए थानों में जाते ही नहीं थे, क्योंकि सुनवाई नहीं होती थी। जब क्राइम कम था। आज मैंने एफआईआर कंपसलरी कर दी, इसलिए एफआईआर की संख्या बढ़नी ही थी।

पहले रेप की घटना पर लोग थाने नहीं जाते थे

गहलोत बोले- पहले रेप की घटना होने पर लोग थाने जाते ही नहीं थे। अंतिम सांस तक वह परिवार दुखी रहता था। पिता कहता था कि मेरी बेटी का रेप हुआ और मैं कुछ नहीं कर पाया। मेरी सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने सुनवाई नहीं की। एक वो जमाना था। हमने उसे ओपन किया और एफआईआर कंपलसरी की, तो लोगों की हिम्मत बढ़ गई कि कोई घटना हुई तो हम पुलिस में रिपोर्ट करेंगे और न्याय सुनिश्चित होगा। मैंने हर थाने में स्वागत कक्ष बनाया। 


लोगों ने विपक्ष से पूछा- आक्रोश तो हमारा आपके खिलाफ है

अगर हम कोई रिफॉर्म करें, तो विपक्ष को उसे एप्रीशिएट करना चाहिए।  तब तो उसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी। हर बात को लेकर वो आलोचना करते जाएंगे, तो विश्वसनीयता नहीं रहेगी। इसीलिए उनकी आक्रोश रैली फेल हुई है। उनके पास एक पॉइंट सरकार के खिलाफ कहने को नहीं है। लोगों ने विपक्ष से पूछा- आक्रोश तो हमारा आपके खिलाफ है। आप यहां पर क्यों आए हो ? बीजेपी की आक्रोश रैली में 200 लोग मुश्किल से इकट्ठा हो रहे हैं। यात्रा ख़त्म होती है, तो 20 लोग बचते हैं। ये स्थिति क्यों हुई? क्योंकि उन्हें हम लोगों ने कोई इश्यू बनाने ही नहीं दिया। 
 
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