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बच्चों समेत फंदे पर लटकने वाले कांस्टेबल के सुसाइड केस की जांच आईजी करेंगे

Fri, 09 Feb 2018 06:08 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 09 Feb 2018 06:08 PM IST
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Police constable suicide case took place in Rajasthan Legislative Assembly
राजस्थान विधानसभा - फोटो : file photo

बच्चों समेत फंदे पर लटककर कांस्टेबल द्वारा खुदकुशी करने का मामला राज्य विधानसभा में उठा। इस पर हुए हंगामे के बाद गृहमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच आईजी स्तर पर कराई जाएगी। 

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राजस्थान के नागौर जिले में 21 जनवरी को पुलिस कांस्टेबल गेना राम द्वारा अपनी पत्नी एवं दो बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली थी। इसके लिए गेना राम ने अपने ही विभाग के लोगों को दोषी ठहराया था। इसके बाद सीओ को जांच सौंपी गई। जांच की निष्पक्षता को लेकर आज राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान ये मामला उठा। 
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इस पर गृहमंत्री कटारिया ने कहा कि एक परिवार के चार लोगों के एक साथ आत्महत्या करने का मामला बहुत ही गंभीर और दुःखद है। उन्होंने कहा कि मृतक गेना राम द्वारा सुसाइड नोट में जिन तीन व्यक्तियों का नाम लिखा गया था उनमें से एक सहायक उप निरक्षक राधाकिशन को निलंबित कर दिया गया था एवं अन्य दो व्यक्ति पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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गृह मंत्री ने कहा कि मृतक गेना राम ने अपने सुसाइड नोट में पुलिस के कुछ अधिकारियों द्वारा  जानबूझकर झूठा चोरी का आरोप लगा कर पूरे परिवार को प्रताड़ित करने तथा उसके नाबालिग बेटे को गिरफ्तार कर, मारपीट करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुसाइड नोट का गहन परीक्षण उच्च अधिकारियों द्वारा करवाया जाएगा। 

सुसाइड नोट में लिखा था ये

Police constable suicide case took place in Rajasthan Legislative Assembly
राजस्थान विधानसभा - फोटो : file photo
कांस्टेबल गेनाराम मेघवाल नागौर जिले के सुरपालिया थाना इलाके के बाघारासर गांव का रहने वाला था। वह नागौर जिले में डीडवाना एएसपी का ड्राइवर था। उसकी पोस्टिंग डीडवाना थाने में चल रही थी।

गेनाराम, पत्नी संतोष, 22 वर्षीया बेटी सुमित्रा और 20 वर्षीय बेटे गणपत सिंह ने 21 जनवरी को फंदा लगाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। 

दरअसल, मृतक के खिलाफ चोरी का एक मामला उसके पड़ोसी एएसआई राधाकिशन ने वर्ष 2012 में दर्ज कराया था। मृतक ने इस मामले के अनुसंधान के दौरान उसे तथा परिवार को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। पांच पेज के सुसाइड नोट में गेनाराम ने अपने ही विभाग के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। 
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