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जो कल तक चल नहीं सकते थे, आज दौड़ने लगे
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 12 Oct 2017 02:53 PM IST
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दौड़ में भाग लेते प्रतिभागी
- फोटो : अमर उजाला
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कल तक जो खड़े होकर चलने में भी समक्ष नहीं थे वो आज सरपट भाग रहे हैं। ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई लोग हैं, जिन्होंने अपनी रफ्तार से लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया।
दरअसल मालवीय नगर स्थित जवाहर सर्किल के मैन गेट से मिनी मैराथॉन शुरू हुई, जिसमें जोड़ प्रत्यारोपण करा चुके पूरे राजस्थान के ढाई सौ से अधिक लोगों ने हौसलों की उड़ान भर कर रोमांचित कर दिया। करीब 3 किलोमीटर की इस मैराथॉन में जोड़ प्रत्यारोपण के लोगों ने अपना दमखम दिखा इतिहास रच दिया।
इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि जयपुर में सभी तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध है। दूसरे राज्यों के मरीज भी किफायती इलाज के लिए जयपुर आते हैं। डॉ. नीरज अग्रवाल ने कहा कि जोड़ प्रत्यारोपण के बाद मरीजों में नवीन ऊर्जा का संचार होता है। स्वस्थ जीवन शैली की वजह से अन्य बीमारियां भी दूर रहती हैं।
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गौरतलब है कि मैराथॉन में ऐसे लोगों की तादाद अधिक थी,जिन्होंने कुछ ही महीने पहले जोड़ों का प्रत्यारोपण कराया था। उन मरीजों ने जवाहर सर्किल का चक्कर काट कर हैरत में डाल दिया जो घुटने की परेशानी से चार कदम भी चल नहीं सकते थे। जोड़ प्रत्योरोपण करा चुके 60 से 80 साल के करीब एक सौ से अधिक लोगों ने जज्बे की नई इबारत लिखी। स्वस्थ रहने के लिए 24 घंटे में 10 हजार कदम चलना बेहद जरूरी है।
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दरअसल मालवीय नगर स्थित जवाहर सर्किल के मैन गेट से मिनी मैराथॉन शुरू हुई, जिसमें जोड़ प्रत्यारोपण करा चुके पूरे राजस्थान के ढाई सौ से अधिक लोगों ने हौसलों की उड़ान भर कर रोमांचित कर दिया। करीब 3 किलोमीटर की इस मैराथॉन में जोड़ प्रत्यारोपण के लोगों ने अपना दमखम दिखा इतिहास रच दिया।
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इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि जयपुर में सभी तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध है। दूसरे राज्यों के मरीज भी किफायती इलाज के लिए जयपुर आते हैं। डॉ. नीरज अग्रवाल ने कहा कि जोड़ प्रत्यारोपण के बाद मरीजों में नवीन ऊर्जा का संचार होता है। स्वस्थ जीवन शैली की वजह से अन्य बीमारियां भी दूर रहती हैं।
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गौरतलब है कि मैराथॉन में ऐसे लोगों की तादाद अधिक थी,जिन्होंने कुछ ही महीने पहले जोड़ों का प्रत्यारोपण कराया था। उन मरीजों ने जवाहर सर्किल का चक्कर काट कर हैरत में डाल दिया जो घुटने की परेशानी से चार कदम भी चल नहीं सकते थे। जोड़ प्रत्योरोपण करा चुके 60 से 80 साल के करीब एक सौ से अधिक लोगों ने जज्बे की नई इबारत लिखी। स्वस्थ रहने के लिए 24 घंटे में 10 हजार कदम चलना बेहद जरूरी है।