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आठ माह में दो चुनाव हार के कारण चर्चा में आया था भाजपा का यह दिग्गज नेता
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:24 PM IST
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डॉ दिगंबर सिंह
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भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान इकाई की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। लगातार उसके दिग्गज नेताओं के निधन से पार्टी में शोक का माहौल है।
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आज पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और बीसूका उपाध्यक्ष डॉ दिगम्बर सिंह का निधन हो गया। भाजपा के कद्दावर जाट नेता के तौर पर राजस्थान में पहचान रखने वाले डॉ सिंह ने वर्ष 2014 में सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी थी।
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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी रहे सिंह को पार्टी ने आठ माह के भीतर ही दो चुनाव में उम्मीवार बनाया था। लेकिन सिंह दोनों ही चुनाव हार गए थे। जिसके बाद पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री के फैसले पर कई सवाल खड़े हुए थे।
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दरअसल वर्ष 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में डॉ दिगंबर सिंह को उनकी परंपरागत डीग-कुम्हेर सीट से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन भाजपा लहर होने के बाद भी वे कांग्रेस के विश्वेन्द्र सिंह से करीब 11000 मतों से चुनाव हार गए थे।
जाट नेता के तौर पर थी पहचान
BJP
इसके बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी होने का उन्हें लाभ मिला और पार्टी ने आठ माह बाद ही झुंझुंनू जिले की सूरजगढ विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में पुन: अपना प्रत्याशी बनाया। जाट बाहुल्य ईलाका होने के बाद भी डॉ सिंह को यहां भी हार का सामना करना पड़ा।
उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार ने 3270 मतों से परास्त किया था। गौरतलब है कि डॉ दिगंबर सिंह की व्यक्तित्व की तारीफ उनके राजनीतिक विरोधी भी करते थे। बीते तीन वर्षों से डॉ सिंह कैंसर से पीड़ित थे। आज उन्होंने जयपुर के ईएचसीसी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार ने 3270 मतों से परास्त किया था। गौरतलब है कि डॉ दिगंबर सिंह की व्यक्तित्व की तारीफ उनके राजनीतिक विरोधी भी करते थे। बीते तीन वर्षों से डॉ सिंह कैंसर से पीड़ित थे। आज उन्होंने जयपुर के ईएचसीसी अस्पताल में अंतिम सांस ली।