फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Instead of accepting the FR, the magistrates should demand progress report

एफआर स्वीकार करने के बजाय प्रगति रिपोर्ट मांगनी चाहिए मजिस्ट्रेट्स को, हाईकोर्ट ने कहा

Wed, 22 Nov 2017 07:23 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 22 Nov 2017 07:23 PM IST
विज्ञापन
Instead of accepting the FR, the magistrates should demand progress report
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस की ओर से माल और मुल्जिम के पता नहीं चलने के आधार पर पेश एफआर को स्वीकार करने के बजाय न्यायिक अधिकारियों को मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगनी चाहिए। बिना प्रगति रिपोर्ट यदि मामले को बंद कर दिया जाता है तो जांच अधिकारी का दायित्व भी खत्म हो जाता है। अदालत ने आदेश की पालना के लिए सभी अधीनस्थ अदालतों को आदेश की प्रति भेजने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन


न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश देवप्रकाश शर्मा की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने साइबर ठगी के इस प्रकरण में निचली अदालत के एफआर स्वीकार करने के आदेश को रद्द करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक अदालत को केस बंद नहीं करने को कहा है। याचिका में अधिवक्ता श्यामलाल शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता से साइबर ठगी कर एक लाख दस हजार रुपए बैंक खाते से निकाले गए। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में गत वर्ष भट्टा बस्ती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता ने अपने स्तर पर आरबीआई से जानकारी लेकर पुलिस को बताया कि आरोपी केरल में मैट्रोकर्मी हैं। इसके बावजूद भी पुलिस ने माल-मुल्जिम का पता नहीं चलने के आधार पर एफआर पेश कर दी। जिसे निचली अदालत ने स्वीकार कर लिया। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश रिवीजन अर्जी को भी अदालत ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed