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सामराउ हत्याकांड : बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करें, हाईकोर्ट के आदेश

Thu, 18 Jan 2018 03:33 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 18 Jan 2018 03:33 PM IST
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Inspector General of Police in Rajasthan highcourt
सामराउ हत्याकांड - फोटो : amar ujala
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में आज सामराउ हत्याकांड मामले में पुलिस महानिरीक्षक जोधपुर रेंज ने घटना की रिपोर्ट पेश की। इस पर कोर्ट ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए।
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हाईकोर्ट के सीनियर जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने ये आदेश रेंज आईजी हवासिंह घूमरिया की ओर से पेश रिपोर्ट पर दिए। खंडपीठ ने आईजी घूमरिया को कहां कि स्थानीय लोगों को पूरी सुरक्षा दें और किसी भी राजनीतिक दल के दबाव के बिना निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करें। हाईकोर्ट मे इस मामल में अब आगामी दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी। गौरतलब है कि शराब कारोबारी हनुमानराम जाट की हत्या के बाद उपजे विवाद, आगजनी और पथराव की घटना को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर पुलिस महानिरीक्षक जोधपुर रेंज से रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
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आईजी रेंज ने ये बताया अपनी रिपोर्ट में

Inspector General of Police in Rajasthan highcourt
बवाल के बाद एक मकान में आग - फोटो : amar ujala
रेंज आईजी हवासिंह घूमरिया ने खंडपीठ में अपनी रिपोर्ट में बताया कि अभी तक 18 मामले दर्ज कर पुलिस अनुसंधान कर रही है। कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्रॉस वेरिफिकेशन कर गिरफ्तारियां की जा रही है। खण्डपीठ ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को पूरी सुरक्षा देते हुए, निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करें। इस मामले में अब दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता भंवरसिंह तामडिया ने कहा कि यह घटना दो अपराधियों के बीच कारित की गई। मरने वाला भी अपराधी था और मारने वाला भी अपराधी। ऐसे में सरकार द्वारा मृतक को मुआवजा दिया जाना आश्चर्यचकित करने वाला है। पुलिस की विफलता के चलते यह घटना घटित हुई है। साथी ही अधिवक्ता तामडिया ने जिन लोगों के मकानों और दुकानों को उपद्रवियों द्वारा जला दिया गया उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

इस पर खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ऐसे मामले में पीड़ित को तुरंत सहायता दी जानी चाहिए।
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