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MLA और MP के कितने मामले सीआईडी सीबी में लंबित, कोर्ट ने पूछा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 10 Jan 2018 07:52 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट पेश कर बताने को कहा है कि कितने विधायकों व सांसदों के मामले सीआईडी सीबी में भेजे गए हैं और उनमें क्या जांच की गई है। इसके साथ ही अदालत ने सरकार को यह भी बताने को कहा है कि इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भेजी गई जांच में अपराध किस प्रकृति के हैं।
न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेशचन्द्र शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता एके जैन ने अदालत को बताया कि सोनी अस्पताल को 24 हजार वर्गमीटर से अधिक के अवैध भूमि आवंटन को लेकर याचिकाकर्ता ने वर्ष 2014 में गांधीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उद्योग मंत्री चन्द्रभान व तत्कालीन जेडीसी एनसी गोयल सहित विमल सोनी को आरोपी बनाया गया था।
पुलिस ने मामले में विधायक के खिलाफ आरोप होने का हवाला देते हुए मामले की जांच सीआईडी सीबी में भेज दी। जिसे चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया कि राजस्थान पुलिस नियम और सीआरपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को जांच के लिए सीआईडी सीबी को भेजा जाएगा।
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पुलिस नियम 2.21 में प्रावधान है कि पुलिस अन्तरराज्यीय मामलों और महिलाओं के खिलाफ संगठित अपराधों सहित अन्य गंभीर मामलों में सीआईडी सीबी की सहायता ले सकती है, लेकिन पुलिस जनप्रतिनिधियों को बचाने के लिए मामलों को सीआईडी सीबी में भेज देती हैं। जहां प्रकरण में कोई जांच नहीं की जाती।
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न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेशचन्द्र शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता एके जैन ने अदालत को बताया कि सोनी अस्पताल को 24 हजार वर्गमीटर से अधिक के अवैध भूमि आवंटन को लेकर याचिकाकर्ता ने वर्ष 2014 में गांधीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उद्योग मंत्री चन्द्रभान व तत्कालीन जेडीसी एनसी गोयल सहित विमल सोनी को आरोपी बनाया गया था।
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पुलिस ने मामले में विधायक के खिलाफ आरोप होने का हवाला देते हुए मामले की जांच सीआईडी सीबी में भेज दी। जिसे चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया कि राजस्थान पुलिस नियम और सीआरपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को जांच के लिए सीआईडी सीबी को भेजा जाएगा।
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पुलिस नियम 2.21 में प्रावधान है कि पुलिस अन्तरराज्यीय मामलों और महिलाओं के खिलाफ संगठित अपराधों सहित अन्य गंभीर मामलों में सीआईडी सीबी की सहायता ले सकती है, लेकिन पुलिस जनप्रतिनिधियों को बचाने के लिए मामलों को सीआईडी सीबी में भेज देती हैं। जहां प्रकरण में कोई जांच नहीं की जाती।
याचिका में ये भी बताया गया
court
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सीआईडी सीबी में विधायक से जुड़ा एक प्रकरण तो 17 साल से जांच में चल रहा है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि डीजीपी ने 3 दिसंबर 1986 को परिपत्र जारी कर विधायक और सांसद के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच सीआईडी सीबी में भेजकर पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दे रखे हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि डीजीपी के इस अवैध परिपत्र को रद्द किया जाए, क्योंकि यह आमजन और जनप्रतिनिधियों में भेदभाव करता है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण सीआईडी सीबी में भेजा जा सकता है, न की आरोपी को देखकर।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से सीआईडी सीबी में 29 जनवरी को लंबित ऐसे प्रकरणों की जानकारी पेश करने को कहा है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि डीजीपी ने 3 दिसंबर 1986 को परिपत्र जारी कर विधायक और सांसद के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच सीआईडी सीबी में भेजकर पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दे रखे हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि डीजीपी के इस अवैध परिपत्र को रद्द किया जाए, क्योंकि यह आमजन और जनप्रतिनिधियों में भेदभाव करता है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण सीआईडी सीबी में भेजा जा सकता है, न की आरोपी को देखकर।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से सीआईडी सीबी में 29 जनवरी को लंबित ऐसे प्रकरणों की जानकारी पेश करने को कहा है।