{"_id":"598c77504f1c1b115a8b4922","slug":"highcourt-said-ig-dinesh-mn-to-present","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईजी दिनेश एमएन पेश होकर बताए, ऐसे आईओ पर क्या हो कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईजी दिनेश एमएन पेश होकर बताए, ऐसे आईओ पर क्या हो कार्रवाई
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 10 Aug 2017 08:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर के सेवर थाना इलाके में हुई हत्या के मामले को आत्महत्या का रूप देने पर एसओजी के आईजी दिनेश एमएन को 18 अगस्त को पेश होने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आईजी से पूछा है कि लचर जांच करने वाले एसओजी के जांच अधिकारी पर क्या कार्रवाई की जाए।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की नाबालिग पुत्री की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता से कुछ लोगों ने छेड़छाड़ करने के बाद उसके पिता तेजपाल की अक्टूबर 2014 में हत्या कर दी थी। इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया। याचिका में कहा गया कि पंखे पर लटके शव के दोनों पांव घुटने से मुड़कर फर्श पर टिके हुए हैं। ऐसे में यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केवल पोक्सो अधिनियम में आरोप पत्र पेश किया है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गत दिनों प्रकरण की जांच एसओजी को सौंपी थी। एसओजी की ओर से अदालत में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर घटना को आत्महत्या का ही बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए एसओजी के आईजी को पेश होने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की नाबालिग पुत्री की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता से कुछ लोगों ने छेड़छाड़ करने के बाद उसके पिता तेजपाल की अक्टूबर 2014 में हत्या कर दी थी। इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया। याचिका में कहा गया कि पंखे पर लटके शव के दोनों पांव घुटने से मुड़कर फर्श पर टिके हुए हैं। ऐसे में यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है।
विज्ञापन
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केवल पोक्सो अधिनियम में आरोप पत्र पेश किया है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गत दिनों प्रकरण की जांच एसओजी को सौंपी थी। एसओजी की ओर से अदालत में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर घटना को आत्महत्या का ही बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए एसओजी के आईजी को पेश होने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन