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जेल डीजी पेश होकर बताए क्यों रिहा नहीं हुआ कैदी, हाईकोर्ट ने पूछा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 03 Jan 2018 07:11 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने डीजी जेल को बृहस्पतिवार को पेश होकर बताने को कहा है कि सजा समाप्त होने के बावजूद भी चेक अनादरण के कैदी को रिहा क्यों नहीं किया गया?
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता चेक अनादरण के छह मामलों में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने गत 8 मार्च को आदेश जारी कर पांच मामलों की सजा एक साथ भुगतने के निर्देश दिए थे। जबकि एक मामले की सजा पूरी हो चुकी है।
याचिका में कहा गया कि सभी मामलों की सजा साथ-साथ चलने के कारण याचिकाकर्ता के पिता को मार्च 2017 में रिहा हो जाना चाहिए था। इसके बावजूद भी उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने सजा के साथ अभियुक्त पर जुर्माना भी लगाया था। जिसे जमा नहीं कराने पर अभियुक्त को अलग से सजा भुगतनी होती है। उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार जुर्माने के बदली भुगती जा रही सजा अलग-अलग ही चलती है।
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ऐसे में याचिकाकर्ता के पिता की सजा आगामी 18 नवंबर तक चलेगी। इसके बावजूद भी यदि गणना में कोई भूल हुई होगी तो उस पर भी विचार कर लिया जाएगा। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने डीजी जेल को पेश होकर तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी देने को कहा है।
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न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता चेक अनादरण के छह मामलों में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने गत 8 मार्च को आदेश जारी कर पांच मामलों की सजा एक साथ भुगतने के निर्देश दिए थे। जबकि एक मामले की सजा पूरी हो चुकी है।
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याचिका में कहा गया कि सभी मामलों की सजा साथ-साथ चलने के कारण याचिकाकर्ता के पिता को मार्च 2017 में रिहा हो जाना चाहिए था। इसके बावजूद भी उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने सजा के साथ अभियुक्त पर जुर्माना भी लगाया था। जिसे जमा नहीं कराने पर अभियुक्त को अलग से सजा भुगतनी होती है। उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार जुर्माने के बदली भुगती जा रही सजा अलग-अलग ही चलती है।
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ऐसे में याचिकाकर्ता के पिता की सजा आगामी 18 नवंबर तक चलेगी। इसके बावजूद भी यदि गणना में कोई भूल हुई होगी तो उस पर भी विचार कर लिया जाएगा। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने डीजी जेल को पेश होकर तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी देने को कहा है।