{"_id":"59cf28bc4f1c1b71548b5146","slug":"here-people-do-not-celebrate-dussehra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"धूम-धाम के बीच आज यहां मनाया जा रहा है रावण के मरने का शोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूम-धाम के बीच आज यहां मनाया जा रहा है रावण के मरने का शोक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 30 Sep 2017 12:38 PM IST
विज्ञापन
रावण का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज देश भर में दशहरा धूम धाम से मनाया जाएगा। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस पर्व पर रावण का दहन भी किया जाएगा और विजयादशमी की खुशियां मनाई जाएंगी। वहीं उल्लास के बीच एक शहर ऐसा है, जो रावण के मरने का शोक मना रहा है।
दरअसल यह शोक मनाया जाएगा जोधपुर जिले के मंडोर शहर में। जोधपुर में कुछ लोग ऐसे हैं, जो रावण यानि दशानन के दहन का बाकायदा शोक मनाते हैं। ये लोग अपने आप को रावण का वंशज मानते हैं।
ऐसा माना जाता है कि रावण का मंदोदरी के साथ जोधपुर के मंडोर में विवाह हुआ था। उस समय रावण के वंशज जो श्रीमाली समाज के गोदा गोत्र के लोग हैं, वह बारात में आए थे और यहीं बस गए थे। तभी से यह लोग जोधपुर में ही निवास कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल यह शोक मनाया जाएगा जोधपुर जिले के मंडोर शहर में। जोधपुर में कुछ लोग ऐसे हैं, जो रावण यानि दशानन के दहन का बाकायदा शोक मनाते हैं। ये लोग अपने आप को रावण का वंशज मानते हैं।
विज्ञापन
ऐसा माना जाता है कि रावण का मंदोदरी के साथ जोधपुर के मंडोर में विवाह हुआ था। उस समय रावण के वंशज जो श्रीमाली समाज के गोदा गोत्र के लोग हैं, वह बारात में आए थे और यहीं बस गए थे। तभी से यह लोग जोधपुर में ही निवास कर रहे हैं।
विज्ञापन
यहां है रावण का मंदिर और एेसे मनाया जाता है शोक
रावण का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
अब इन लोगों ने रावण का मंदिर बनवाया है और नियमित रूप से यह लोग रावण की पूजा भी करते हैं। जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी में रावण और उसकी पत्नी मंदोदरी का मंदिर बना हुआ हैं।
श्रीमाली ब्राह्मण समाज के गोदा गोत्र के लोगों ने यह मंदिर बनवाया है। इस मंदिर में रावण व मंदोदरी की अलग-अलग विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। दोनों को शिव पूजन करते हुए दर्शाया गया है।
पुजारी कमलेश कुमार दवे का दावा है कि उनके पूर्वज रावण के विवाह के समय यहां आकर बस गए। पहले रावण की तस्वीर की पूजा करते थे, लेकिन वर्ष 2008 में इस मंदिर का निर्माण कराया गया। हम लोग रावण की पूजा कर उनके अच्छे गुणों को लेने का प्रयास करते हैं।
दशहरा पर रावण दहन की दिन यह लोग यहां शोक रखते हैं। इस यह लोग रावण दहन देखने नहीं जाते हैं। शोक मनाते हुए शाम को स्नान कर जनेऊ को बदला जाता है और रावण के दर्शन करने के बाद ही भोजन आदि करते हैं।
श्रीमाली ब्राह्मण समाज के गोदा गोत्र के लोगों ने यह मंदिर बनवाया है। इस मंदिर में रावण व मंदोदरी की अलग-अलग विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। दोनों को शिव पूजन करते हुए दर्शाया गया है।
पुजारी कमलेश कुमार दवे का दावा है कि उनके पूर्वज रावण के विवाह के समय यहां आकर बस गए। पहले रावण की तस्वीर की पूजा करते थे, लेकिन वर्ष 2008 में इस मंदिर का निर्माण कराया गया। हम लोग रावण की पूजा कर उनके अच्छे गुणों को लेने का प्रयास करते हैं।
दशहरा पर रावण दहन की दिन यह लोग यहां शोक रखते हैं। इस यह लोग रावण दहन देखने नहीं जाते हैं। शोक मनाते हुए शाम को स्नान कर जनेऊ को बदला जाता है और रावण के दर्शन करने के बाद ही भोजन आदि करते हैं।