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Birthday special: तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे...

Sat, 15 Apr 2017 01:18 PM IST
मनीष कुमार शर्मा/जयपुर
मनीष कुमार शर्मा/जयपुर Updated Sat, 15 Apr 2017 01:18 PM IST
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hasrat jaipuri birthday special
हसरत जयपुरी
मशहूर गीत है तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे...। 'पगला कहीं का' फिल्म का यह गीत मोहम्मद रफी ने गाया और इस गीत के बोल लिखे थे हसरत जयपुरी ने। आज 15 अप्रैल को उनका 95वां जन्मदिन है। वे भले ही हमारे बीच नहीं हो, लेकिन हम उन्हें भुला नहीं सकते।
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जयपुर से ताल्लुक रखने वाले हसरत जयपुरी के लिखे गीत आज भी लोगों की जुबां पर हैं। 15 अप्रैल 1922 को जन्मे हसरत जयपुरी का मूल नाम इकबाल हुसैन था। जयपुर में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद अपने दादा फिदा हुसैन से उर्दू और फारसी की तालीम ली। जब ये 20 साल के हुए तो इनका झुकाव कविताओं की तरफ होने लगा। 1940 में नौकरी की तलाश में मुम्बई पहुंचे। वहां कंडक्टर का काम किया, जिसमें उन्हें 11 रुपए का वेतन मिला। अपनी लेखनी के चलते हसरत ने मुशायरों में जाना शुरू किया और अपने नाम के आगे जयपुर का नाम लगाया।
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एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने हसरत को देखा। फिर फिल्मों में गीत लिखवाने के लिए अपने बेटे राजकपूर से उनकी सिफारिश की। राजकपूर उन दिनों 1949 में फिल्म बरसात के लिए गीतकार की तलाश कर रहे थे। उन्हें हसरत जयपुरी का ध्यान आया और उन्होंने हसरत से गीत लिखने को कहा।
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हसरत ने अपना पहला गीत बरसात फिल्म के लिए जिया बेकरार है... लिखा। संगीतकार शंकर—जयकिशन की भी बरसात पहली फिल्म थी। इसके बाद जयपुर का ये लाल हसरत जयपुरी के नाम से फिल्म जगत में मशहूर होता चला गया। हिन्दी फिल्मों में जब भी टाइटल सॉन्ग का जिक्र होता, हसरत जयपुरी की याद निर्माता—निर्देशक को उनकी ओर खींच लाती।

ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर के तुम नाराज ना होना

hasrat jaipuri birthday special
हसरत जयपुरी
20 साल की उम्र में हसरत जयपुरी को पड़ोस में ही रहने वाली लड़की राधा से इश्क हो गया। राधा से अपने प्रेम का इजहार हसरत जयपुरी साफ—साफ नहीं कर सके। इसका उपाय उन्होंने अपने शब्दों के जरिये ही निकाला। उन्होंने राधा के लिए एक कविता लिखकर अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोया। उन्होंने लिखा ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज ना होना...। बाद में यही पंक्तियां सन् 1964 में फिल्म संगम का लोकप्रिय गीत बनीं।

हसरत जयपुरी ने हिन्दी फिल्मों में कई मशहूर गीत लिखे। इनमें उनके पहले गीत की कहानी शंकर—जयकिशन से जुड़ी है। शंकर—जयकिशन ने बरसात फिल्म के गाने के लिए पहले ही एक धुन बना रखी थी जो ये थी...अम्बुआ का पेड़ है गोरी मुंडेर है, आजा मोरे बालमा, अब काहे की देर है...। इस धुन को सुनकर हसरत जयपुरी ने अपना पहला गाना लिखा...जिया बेकरार है छाई बहार है आजा मोरे बालमा तेरा इंतजार है...।

इसके बाद तो उन्होंने कई मशहूर गीत लिखे जिनमें दुनिया बनाने वाले काहे को दुनिया बनाई.., एहसान तेरा होगा मुझ पर..., काश्मीर की कली हूं मैं..., तेरी प्यारी प्यारी सूरत को..., बदन पे सितारे लपेटे हुए..., अप्रेल फूल बनाया, नील गगन की छांव में..., जिंदगी एक सफर है सुहाना..., पंख होते तो उड़ आती रे..., सायोनारा सायोनारा..., सुन साहिबा सुन..., बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं... जैसे टाइटल शामिल हैं। 17 सितम्बर 1999 को हसरत जयपुरी ने इस दुनिया अलविदा कह दिया। 
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