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मांड गायन की पहचान बनी मांगीबाई का निधन, श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे कलाकार

Thu, 23 Nov 2017 06:19 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 23 Nov 2017 06:19 PM IST
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folk singer mangi bai pass away in udaipur
मांगीबाई - फोटो : amar ujala
राजस्थान सहित पूरे देश में मांड गायन की पहचान बनी गायिका मांगीबाई आर्य का आज सुबह उदयपुर में निधन हो गया। मूलत: प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली आर्य लम्बे समय से उदयपुर के भट्टियानी चौहट्टा में छोटे बेटे के साथ रह रही थीं।
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उनके निधन की सूचना से लोक कला जगत में शोक की लहर है। आज जैसे ही उनके निधन का समाचार लोगों तक पहुंचा, कई लोक कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार शाम को किया गया।  
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राजस्थानी लोक गायन को समर्पित मांगीबाई मांड गायन शैली को 4 वर्ष की उम्र से ही सीखने लगी थीं। उनका विवाह बड़ीसादड़ी राजघराने के प्रमुख गायक रामनारायण आर्य के साथ हुआ था, जिनका पहले ही निधन हो चुका है। मांगीबाई ने अपने गीतों के संकलन की एक पुस्तक भी प्रकाशित करवाई, जिसे पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र ने अपने सभी पुस्तकालयों में रखवाया। उन्होंने 20 वर्ष तक पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में लोक गायन शिक्षिका के पद पर भी कार्य किया।
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टीवी सीरियल में भी किया था गायन

folk singer mangi bai pass away in udaipur
फाइल फोटो
मांगीबाई ने टीवी सीरियल रंग बदलती दुनिया, प्रौढ़ निदेशालय अहमदाबाद तथा टीवी सीरियल फोर्ट एंड प्लेसेज ऑफ राजस्थान में पार्श्व गायन किया। उन्हें आकाशवाणी महानिदेशालय की ओर से भी नवाजा गया।

उन्हें 1982 में महाराणा कुंभा संगीत परिषद उदयपुर, 1987 में बीएन प्रबंध समिति, 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 15 अगस्त को जयपुर में, वर्ष 2003 में मरुधरा संस्था, 2006 में राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी बीकानेर, 2007 में राज्यपाल पुरस्कार, 2008 में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर, केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली, 31 दिसम्बर 2010 में मध्यप्रदेश सरकार, 11 सितम्बर 2011 को राजस्थान रत्नाकर संस्थान नई दिल्ली की ओर से सम्मानित किया गया। इनके अलावा भी मांगीबाई को कई सम्मान और पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
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