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सबसे बड़े अस्पताल की लैब में धमाका... .फैल गया खून ही खून
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 18 Sep 2017 02:43 PM IST
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लैब में ब्लास्ट के बाद मशीन
- फोटो : अमर उजाला
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अस्पताल की लैब में उस वक्त भगदड़ मच गई जब वहां एक जोर का धमाका हुआ। धमाके की आवाज सुनते ही लैब के कर्मचारी बाहर की ओर से भागे। लैब में चारों तरफ सामान बिखर गया और दो कर्मचारी गंभीर घायल हो गए।
जयपुर के एसएमएस अस्पताल की धनवन्तरी ओपीडी की सेंट्रल माइक्रोबायोलोजिकल लैब में आज सुबह करीब साढ़े दस बजे धमाका हुआ। यह धमाका ओपीडी की सेंट्रीफ्यल मशीन में हुआ था। यह मशीन ब्लड सैम्पल को टेस्टिंग के दौरान काम आती है। सैम्पल की जांच करने से पहले उन्हें इसमें रखकर तेजी से घुमाया जाता है। ब्लास्ट के समय उसमें कई सैम्पल रखे हुए थे। ब्लास्ट के बाद चारों तरफ खून ही खून फैल गया।
मशीन में ब्लास्ट होते ही कमरे में मौजूद कर्मचारी बाहर जाने लगे। इस दौरान दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। एक कर्मचारी राहुल के जहां हाथ में फ्रेक्चर आया है। वहीं दूसरे कर्मचारी बनवारी के जबड़े में गंभीर चोट आई है।
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जयपुर के एसएमएस अस्पताल की धनवन्तरी ओपीडी की सेंट्रल माइक्रोबायोलोजिकल लैब में आज सुबह करीब साढ़े दस बजे धमाका हुआ। यह धमाका ओपीडी की सेंट्रीफ्यल मशीन में हुआ था। यह मशीन ब्लड सैम्पल को टेस्टिंग के दौरान काम आती है। सैम्पल की जांच करने से पहले उन्हें इसमें रखकर तेजी से घुमाया जाता है। ब्लास्ट के समय उसमें कई सैम्पल रखे हुए थे। ब्लास्ट के बाद चारों तरफ खून ही खून फैल गया।
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मशीन में ब्लास्ट होते ही कमरे में मौजूद कर्मचारी बाहर जाने लगे। इस दौरान दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। एक कर्मचारी राहुल के जहां हाथ में फ्रेक्चर आया है। वहीं दूसरे कर्मचारी बनवारी के जबड़े में गंभीर चोट आई है।
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इसलिए फटी मशीन
लैब में फैल गया सामान
- फोटो : अमर उजाला
घायल कर्मचारी राहुल ने बताया कि सुबह ऐसा धमाका हुआ जैसे कोई टायर फटा हो और देखा तो मशीन फट गई थी। हम उसकी चपेट में आ गए थे। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने संभाला और भर्ती करवाकर ईलाज शुरू किया।
इस मामले में जानकारों का कहना है कि इस तरह के हादसों के पीछे मशीन पुरानी होने व ठेके पर काम करवाने के कारण हो सकते हैं। ठेके पर होने से ट्रेंड कर्मचारियों की कमी देखने को मिलती है। ऐसे हादसे उन्हीं का परिणाम होते हैं।
इस मामले में जानकारों का कहना है कि इस तरह के हादसों के पीछे मशीन पुरानी होने व ठेके पर काम करवाने के कारण हो सकते हैं। ठेके पर होने से ट्रेंड कर्मचारियों की कमी देखने को मिलती है। ऐसे हादसे उन्हीं का परिणाम होते हैं।