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दलितों को राहत देने के लिए राज्य सरकार कर रही प्रभावी कार्यवाही, लेकिन कुछ कमियां- दत्तू
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 19 Jan 2018 02:10 PM IST
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एच.एल. दत्तू
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एच.एल. दत्तू ने कहा है कि एसटी-एससी और दलितों को राहत देने के लिए राज्य सरकार प्रभावी कार्यवाही कर रही है। उन्हें खुशी है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं को वंचितों तक पहुंचा रही है। हालांकि अभी भी कुछ कमियां हैं, लेकिन उन्हें एक दिन में दूर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस दत्तु ने यह विचार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से आयोजित दो दिवसीय जन सुनवाई के बाद मीडिया के समक्ष रखे। एक सवाल के जवाब मे उन्होंने बताया कि आयोग ने पूर्व में गोरक्षको के मामलों में प्रसंज्ञान लिया है। वहीं, जिन राज्यों में जिला स्तर पर मानवाधिकार अदालतें नहीं हैं, उन राज्यो को पत्र लिखे गए हैं। जस्टिस दत्तू ने कहा की जनसुनवाई मे हम अफसरों से मिले हैं। अफसरों को कहा गया है कि आयोग के आदेशों की पालना की जाए।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की जनसुनवाई के दौरान अस्पताल मे 80 बच्चों की मौत के मामले मे क्षतिपूर्ति दिलाई गई है। इसके अलावा जनसुनवाई के पहले दिन 169 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से 57 मामलों को राहत मिलने के आधार पर समाप्त किया गया, वहीं 108 मामलों में अग्रिम रिपोर्ट मांगी गई है।
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जबकि दूसरे दिन पूर्णपीठ ने 14 मामलों की सुनवाई की। इनमें से 5 मामलों को समाप्त किया गया। वहीं, अन्य मामलो में पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति दिलाई गई।
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जस्टिस दत्तु ने यह विचार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से आयोजित दो दिवसीय जन सुनवाई के बाद मीडिया के समक्ष रखे। एक सवाल के जवाब मे उन्होंने बताया कि आयोग ने पूर्व में गोरक्षको के मामलों में प्रसंज्ञान लिया है। वहीं, जिन राज्यों में जिला स्तर पर मानवाधिकार अदालतें नहीं हैं, उन राज्यो को पत्र लिखे गए हैं। जस्टिस दत्तू ने कहा की जनसुनवाई मे हम अफसरों से मिले हैं। अफसरों को कहा गया है कि आयोग के आदेशों की पालना की जाए।
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उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की जनसुनवाई के दौरान अस्पताल मे 80 बच्चों की मौत के मामले मे क्षतिपूर्ति दिलाई गई है। इसके अलावा जनसुनवाई के पहले दिन 169 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से 57 मामलों को राहत मिलने के आधार पर समाप्त किया गया, वहीं 108 मामलों में अग्रिम रिपोर्ट मांगी गई है।
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जबकि दूसरे दिन पूर्णपीठ ने 14 मामलों की सुनवाई की। इनमें से 5 मामलों को समाप्त किया गया। वहीं, अन्य मामलो में पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति दिलाई गई।