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मुख्यमंत्री राजे के खिलाफ कोर्ट में पेश हुई आपराधिक अवमानना याचिका, ये है मामला
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 07 Feb 2018 08:56 PM IST
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वसुंधरा राजे
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लोकसेवकों के खिलाफ अदालत में इस्तगासा पेश करने से पूर्व सरकार की अनुमति लेने के मामले में जारी किए गए अध्यादेश के संबंध में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से दिए बयान को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री राजे के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पेश की गई है। याचिका पर संभवत: अगले सप्ताह सुनवाई होगी।
अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी की ओर से पेश इस आपराधिक अवमानना याचिका में कहा गया कि राजस्थान सरकार ने गत 7 सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर लोकसेवकों के खिलाफ पेश इस्तगासे को सीआरपीसी की धारा 156(3) में अनुसंधान के लिए पुलिस में भेजने के पूर्व सरकार से स्वीकृति लेने का प्रावधान किया। अधिसूचना में कहा गया कि यदि 180 दिन में अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय नहीं करती है तो स्वीकृति दी हुई मानी जाएगी। इस दौरान संबंधित लोक सेवक का नाम सार्वजनिक करने वाले व्यक्ति को दो साल की सजा का भी प्रावधान किया गया।
याचिका में कहा गया कि इस संबंध में 27 अक्टूबर 2017 को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का साक्षात्कार एक समाचार पत्र में छपा था। जिसमें सीएम ने बयान दिया था कि सीआरपीसी की धारा 156(3) के दुरुपयोग की लगातार शिकायतें मिल रही थी। रिकॉर्ड से पता चला कि ऐसे 73 मामले झूठे निकले। ऐसे मामले दर्ज होने से प्रतिष्ठित और ईमानदार लोकसेवकों की प्रतिष्ठा पर आंच आई और उनका मनोबल टूटा।
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अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी की ओर से पेश इस आपराधिक अवमानना याचिका में कहा गया कि राजस्थान सरकार ने गत 7 सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर लोकसेवकों के खिलाफ पेश इस्तगासे को सीआरपीसी की धारा 156(3) में अनुसंधान के लिए पुलिस में भेजने के पूर्व सरकार से स्वीकृति लेने का प्रावधान किया। अधिसूचना में कहा गया कि यदि 180 दिन में अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय नहीं करती है तो स्वीकृति दी हुई मानी जाएगी। इस दौरान संबंधित लोक सेवक का नाम सार्वजनिक करने वाले व्यक्ति को दो साल की सजा का भी प्रावधान किया गया।
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याचिका में कहा गया कि इस संबंध में 27 अक्टूबर 2017 को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का साक्षात्कार एक समाचार पत्र में छपा था। जिसमें सीएम ने बयान दिया था कि सीआरपीसी की धारा 156(3) के दुरुपयोग की लगातार शिकायतें मिल रही थी। रिकॉर्ड से पता चला कि ऐसे 73 मामले झूठे निकले। ऐसे मामले दर्ज होने से प्रतिष्ठित और ईमानदार लोकसेवकों की प्रतिष्ठा पर आंच आई और उनका मनोबल टूटा।
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याचिका में ये भी कहा गया
याचिका में कहा गया कि गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने भी मुख्यमंत्री राजे के समान ही बयान दिया। याचिका में कहा गया कि सीएम और गृहमंत्री के बयान से न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को आघात लगा है। इस बयान ने न्यायपालिका की अवमानना हुई है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस संबंध में महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर मुख्यमंत्री के खिलाफ अवमानना याचिका पेश करने या याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति देने की गुहार की गई।
इसके बावजूद महाधिवक्ता ने ना तो स्वयं अवमानना याचिका पेश की और ना ही याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति दी। ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री राजे के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पेश की गई।
इसके बावजूद महाधिवक्ता ने ना तो स्वयं अवमानना याचिका पेश की और ना ही याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति दी। ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री राजे के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पेश की गई।