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दिव्यांग बोली, एक महीने तक उसके साथ हुआ गैंगरेप
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 04 Aug 2017 05:45 PM IST
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- फोटो : google
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दिव्यांग युवती का कहना है कि कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर एक महीने तक दुष्कर्म किया। अब समझौते के लिए पुलिस उस पर दबाव बना रही है।
पीड़िता जब पुलिस तक पहुंची तो पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इस पर उसने कोर्ट के जरिये अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाई। मामला राजस्थान के उदयपुर के गोवर्धन विलास थाना पुलिस का है। पीड़ित युवती और पिता ने आज यहां पत्रकारों के सामने अपनी पीड़ा बयां की। युवती का आरोप है कि 8 मई 2017 को वेणीराम, राज पटेल, अनिल मीणा और कैलाश पटेल उसका अपहरण करके ले गए और खरबर गांव में स्थित एक कमरे में एक महीने पांच दिन तक बंद रखकर दुष्कर्म किया। जब भी उसने इसका विरोध किया तो उसे चाकू दिखाकर मारने की धमकी दी।
इस बीच उसके पिता बेटी की गुमशुदगी भी दर्ज करवाई। आरोपित 12 जून की रात युवती को खरबर से बांसवाड़ा ले गए और वहां रात के अंधेरे में छोड़कर फरार हो गए। उस जगह से कुछ देर बाद पुलिस की गाड़ी गुजरी तो उसने उदयपुर में गोवर्धन विलास थाने को सूचना दी। जिसके बाद पहुंची थाना पुलिस को उसने आपबीती सुनाई। मेडिकल जांच भी की गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
युवती का आरोप है कि पुलिस ने उस पर समझौते का दबाव डाला। ऐसे में उसे मजबूर होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उधर, पीड़िता के परिजनों ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपितों से उन्हें जान का खतरा बना हुआ है। इधर, मामले में अब तक पुलिस की ओर से कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया गया है।
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आरोपित वेणीराम और उसके परिजनों ने सभी आरोपों को नकार दिया है। उनका कहना है कि वे जांच को तैयार हैं। इन्होंने यह भी कहा कि हिस्ट्रीशीटर लालाराम गुर्जर सहित कुछ लोगों ने इस कांड को अंजाम दिया है।
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पीड़िता जब पुलिस तक पहुंची तो पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इस पर उसने कोर्ट के जरिये अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाई। मामला राजस्थान के उदयपुर के गोवर्धन विलास थाना पुलिस का है। पीड़ित युवती और पिता ने आज यहां पत्रकारों के सामने अपनी पीड़ा बयां की। युवती का आरोप है कि 8 मई 2017 को वेणीराम, राज पटेल, अनिल मीणा और कैलाश पटेल उसका अपहरण करके ले गए और खरबर गांव में स्थित एक कमरे में एक महीने पांच दिन तक बंद रखकर दुष्कर्म किया। जब भी उसने इसका विरोध किया तो उसे चाकू दिखाकर मारने की धमकी दी।
इस बीच उसके पिता बेटी की गुमशुदगी भी दर्ज करवाई। आरोपित 12 जून की रात युवती को खरबर से बांसवाड़ा ले गए और वहां रात के अंधेरे में छोड़कर फरार हो गए। उस जगह से कुछ देर बाद पुलिस की गाड़ी गुजरी तो उसने उदयपुर में गोवर्धन विलास थाने को सूचना दी। जिसके बाद पहुंची थाना पुलिस को उसने आपबीती सुनाई। मेडिकल जांच भी की गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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युवती का आरोप है कि पुलिस ने उस पर समझौते का दबाव डाला। ऐसे में उसे मजबूर होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उधर, पीड़िता के परिजनों ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपितों से उन्हें जान का खतरा बना हुआ है। इधर, मामले में अब तक पुलिस की ओर से कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया गया है।
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आरोपित वेणीराम और उसके परिजनों ने सभी आरोपों को नकार दिया है। उनका कहना है कि वे जांच को तैयार हैं। इन्होंने यह भी कहा कि हिस्ट्रीशीटर लालाराम गुर्जर सहित कुछ लोगों ने इस कांड को अंजाम दिया है।