फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   civil society showed its concern

सामाजिक संस्थाओं के पास विचार तो बहुत पर लागू नहीं किए जाते:सिविल सोसायटी

Wed, 27 Sep 2017 02:48 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 27 Sep 2017 02:48 PM IST
विज्ञापन
civil society showed its concern
कार्यक्रम में मौजूद सिविल सोसायटी के सदस्य - फोटो : amar ujala
महिलाओं और युवतियों  के साथ लिंग आधारित हिंसा जैसे बाल विवाह, बाल यौन शोषण और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों की प्रभावी रोकथाम को लेकर सिविल सोसायटी के सदस्यों ने अपनी चिंता जाहिर की है। 
विज्ञापन

सोसायटी के सदस्यों की ओर से कहा गया कि मामलों की प्रभावी रोकथाम के लिए अब सिर्फ फिक्र करने से काम नहीं चलेगा।

सामाजिक संस्थाओं को सरकार के संबंधित विभागों को इसके लिए पूरे समन्वय के साथ काम करना होगा और सामाजिक संस्थाएं जो नवाचार  कर रही है, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सरकार को उनकी आर्थिक मदद भी करनी होगी, क्योंकि सामाजिक संस्थाओं के पास नए विचार तो होते हैं, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए संसाधनों की कमी होती है।
विज्ञापन


सेव द चिल्ड्रन और हरिश्चंद्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) के चाइल्ड रिसोर्स सेंटर की ओर से मंगलवार को संस्थान के पटेल भवन में आयोजित सिविल सोसायटी की संस्थाओं के सम्मेलन में यह विचार सामने आए। यह सम्मेलन महिलाओं और लड़कियों के साथ लिंग आधारित हिंसा विशेषकर बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या और बाल यौन उत्पीड़न के मुद्दों पर सिविल सोसायटी संस्थाओ व सरकार की भूमिका पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था। सम्मेलन में आए सुझावों को सरकार के पास भेजा जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एचसीएम रीपा की डायरेक्टर जनरल और अतिरिक्त मुख्य सचिव गुरजोत कौर ने कहा कि राजस्थान में महिलाओं के मुद्दों पर सिविल सोसायटी संस्थाओ ने बहुत सक्रियता से काम किया है। 

 

केवल चिंता होती है जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं

civil society showed its concern
कार्यक्रम में मौजूद सिविल सोसायटी के सदस्य - फोटो : amar ujala
सत्र की अध्यक्षता करते हुए पूर्व आईएएएस अधिकारी और सिविल सोसायटी संस्था दूसरा दशक के अध्यक्ष राजेन्द्र भानावत ने कहा कि लिंग आधारित हिंसा पर हम चिंता तो लम्बे समय से कर रहे है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस बारे में कुछ ठोस जमीनी काम किया जाए, क्योंकि ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।

आज भी हम महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं। उन्होने कहा कि लिंग आधारित हिंसा का सम्बन्ध सिर्फ गरीबी और अशिक्षा से नहीं है, बल्कि यह हर जगह मौजूद है। ऐसे में इनसे जुड़े सभी पक्षों को संवेदनशील बनाने की जरूरत है और जो लोग हिंसा का प्रतिकार करते है, उन्हें समर्थन देने तथा जो स्वीकार कर लेते है, उनका सामाजिक बहिष्कार करने की जरूरत है। 

एचसीएम रीपा के चाइल्ड रिसोर्स सेंटर की सीनियर फैलो और पूर्व आईएएस अधिकारी राजेश यादव ने कहा कि इन मुद्दों पर काफी काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस दिशा में सिविल सोसायटी संस्थााओ के साथ यह संवाद बहुत उपयोगी साबित होगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed