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अपने आप को फंसा महसूस कर रहे भाजपा नेता, हार का दिख रहा असर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 16 Oct 2017 12:38 PM IST
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वसुंधरा राजे
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी और जीएसटी के कारण चौतरफा हमला झेल रही भाजपा सरकार की मुश्किलों में और इजाफा हो सकता है। क्योंकि पंजाब की गुरुदासपुर लोकसभा सीट और केरल की एक विधानसभा सीट पर मिली हार के बाद अब राजस्थान में होने वाले उपचुनाव भी पार्टी के लिए सिरदर्द बन गए है।
यहां तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी की मैराथन बैठकों के बाद ही प्रत्याशी तय नहीं हो सके हैं। अलवर व अजमेर की लोकसभा सीट व मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर अब तक भाजपा का कब्जा था। गौरतलब है कि अलवर लोकसभा सीट का टिकिट पाने के लिए पार्टी के पास दस से ज्यादा दावेदार हैं, जिसमें प्रमुख है बाबा मस्तनाथ स्थल बोहर मठ के महंत बाबा बालकनाथ।
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यहां तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी की मैराथन बैठकों के बाद ही प्रत्याशी तय नहीं हो सके हैं। अलवर व अजमेर की लोकसभा सीट व मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर अब तक भाजपा का कब्जा था। गौरतलब है कि अलवर लोकसभा सीट का टिकिट पाने के लिए पार्टी के पास दस से ज्यादा दावेदार हैं, जिसमें प्रमुख है बाबा मस्तनाथ स्थल बोहर मठ के महंत बाबा बालकनाथ।
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कांग्रेस के लिए परेशानी है कम
सचिन पायलट
इधर, रविवार को जयपुर में हुई भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक में उनके नाम का विरोध अलवर के स्थानीय विधायकों ने किया है। बैठक में आवाज उठी कि किसी को बाहरी को टिकिट देना पार्टी की हार का कारण बन सकता है।
वहीं अजमेर लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद सांवरलाल जाट के बेटे को टिकिट देने पर पार्टी पर वंशवाद को बढ़ावा देने की मोहर लग सकती है। जबकि कांग्रेस में टिकिटों को लेकर मारमारी कम ही दिख रही है। माना जा रहा है कि पार्टी लगभग अपने उम्मीवाद तय कर चुकी है।
वहीं अजमेर लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद सांवरलाल जाट के बेटे को टिकिट देने पर पार्टी पर वंशवाद को बढ़ावा देने की मोहर लग सकती है। जबकि कांग्रेस में टिकिटों को लेकर मारमारी कम ही दिख रही है। माना जा रहा है कि पार्टी लगभग अपने उम्मीवाद तय कर चुकी है।