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भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य भानु कुमार शास्त्री का निधन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:58 PM IST
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फाइल फोटो
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भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व सांसद भानु कुमार शास्त्री का तड़के निधन हो गया। जानकारी के अनुसार शास्त्री का आज तड़के तीन बजे उदयपुर में निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा आज सुबह करीब 10:30 बजे उदयपुर में उनके निवास शिवाजी नगर से अशोक नगर मोक्षधाम के लिए रवाना होगी।
जनसंघ के संस्थापक सदस्य रह चुके भानु कुमार शास्त्री 1977 में उदयपुर से सांसद रहे एवं खादी बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके थे और इस समय वे भारतीय जनता पार्टी के सबसे बुजुर्ग नेताओं में से एक थे। शास्त्री भारतीय जनसंघ की अंतिम पीढ़ी के अवशेषों में से एक थे जो लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से भी वरिष्ठ थे।
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जनसंघ के संस्थापक सदस्य रह चुके भानु कुमार शास्त्री 1977 में उदयपुर से सांसद रहे एवं खादी बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके थे और इस समय वे भारतीय जनता पार्टी के सबसे बुजुर्ग नेताओं में से एक थे। शास्त्री भारतीय जनसंघ की अंतिम पीढ़ी के अवशेषों में से एक थे जो लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से भी वरिष्ठ थे।
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शास्त्री का जन्म 29 अक्टूबर 1925 को सिंध प्रदेश के हैदराबाद (जो अब पाकिस्तान में है) में प्रसिद्ध ज्योतिषी पं. गिरिधर लाल शर्मा के घर हुआ। भारत-पाक विभाजन की त्रासदी के बाद वे उदयपुर आए और इसी को अपनी कर्मभूमि बना लिया। खासतौर से मेवाड़ अंचल की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। शास्त्री को सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले नेताओं में शुमार किया जाता है। जीवन भर इसी सादगी के साथ रहकर शुचिता का पर्याय बन उन्होंने जनजाति क्षेत्र में शिक्षा व राजनीतिक जागरूकता का कार्य किया।
उनका राजनीतिक जीवन लम्बा रहा। वे पूर्व सांसद व काबिना मंत्री के दर्जे के साथ निगम एवम बोर्डों के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें संघ के साधारण स्वयंसेवक से लेकर संसद तक की दीर्घ यात्रा में पं. दीनदयाल उपाध्यक्ष, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, भैरोसिंह शेखावत, जगन्नाथराव जोशी, सुन्दरसिंह भण्डारी, संघ के सरसंघ चालक मा.स. गोलवलकर (गुरूजी), बाला साहेब, देवरस, एकनाथ रानाडे व माधवराव मूले जैसे नायकों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श व सहचर्य का सौभाग्य प्राप्त रहा।
उनका राजनीतिक जीवन लम्बा रहा। वे पूर्व सांसद व काबिना मंत्री के दर्जे के साथ निगम एवम बोर्डों के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें संघ के साधारण स्वयंसेवक से लेकर संसद तक की दीर्घ यात्रा में पं. दीनदयाल उपाध्यक्ष, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, भैरोसिंह शेखावत, जगन्नाथराव जोशी, सुन्दरसिंह भण्डारी, संघ के सरसंघ चालक मा.स. गोलवलकर (गुरूजी), बाला साहेब, देवरस, एकनाथ रानाडे व माधवराव मूले जैसे नायकों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श व सहचर्य का सौभाग्य प्राप्त रहा।
जेल मे बिताए 40 साल
bhanu kumar shastri
1967 के विधानसभा चुनाव में भानुजी ने तत्का्लीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के खिलाफ चुनाव लड़ा। चुनाव के पश्चात उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। अपने विरुद्ध आए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 1942 में संघ के स्वयंसेवक बनने के बाद 1951 में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने।
शास्त्री ने जीवन के 40 माह जेल में बिताए इसी दौरान बहन की शादी के लिये पैरोल पर आये और तुरन्त वापस जेल चले गये। उदयपुर सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद से लेकर उपसभापति, विधायक, सांसद, लघु उद्योग निगम व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष रहे शास्त्री के शुचितापूर्ण, सिद्धान्तनिष्ठ जीवन पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा पाया। 25 जून 1975 से शुरू हुए आपातकाल के संघर्ष के समय वे जनसंघ के प्रदेशाध्यक्ष थे।
शास्त्री ने जीवन के 40 माह जेल में बिताए इसी दौरान बहन की शादी के लिये पैरोल पर आये और तुरन्त वापस जेल चले गये। उदयपुर सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद से लेकर उपसभापति, विधायक, सांसद, लघु उद्योग निगम व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष रहे शास्त्री के शुचितापूर्ण, सिद्धान्तनिष्ठ जीवन पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा पाया। 25 जून 1975 से शुरू हुए आपातकाल के संघर्ष के समय वे जनसंघ के प्रदेशाध्यक्ष थे।