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छुट्टी काटकर ड्यूटी पर लौटा जवान लेह में हुआ शहीद
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 04 Sep 2017 02:59 PM IST
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शहीद रामसिंह
- फोटो : amar ujala
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अलवर जिले के बानसूर क्षेत्र के ज्ञानपुरा गांव निवासी जांबाज रामसिंह चौधरी जम्मू-कश्मीर की कारगिल और लेह सेक्टर में शहीद हो गए हैं जिनका पार्थिव शरीर आज दोपहर तक उनके पैतृक गांव ज्ञानपुरा पहुंचेगा। यहां उनका राजकीय सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार लेह सेक्टर में ड्यूटी के दौरान शनिवार दोपहर हवलदार रामसिंह शहीद हो गए थे।
शहीद रामसिंह 22 जाट रेजिमेंट में हवलदार के पद पर तैनात थे। उनके शहीद होने की सूचना से गांव में माहौल गमहीन बना हुआ है। पत्नी और बच्चों के साथ परिवार के सदस्यों का रो रो कर बुरा हाल है। परिवार के सदस्य पथराई नम आंखों से शहीद के शव का इंतजार कर रहे हैं।
शहीद रामसिंह के परिवार में तीन भाई है जिनमे रामसिंह सबसे बड़े थे और दोनों छोटे भाई खेती का काम करते हैं। जबकि उनके एक बेटा और बेटी है। शहीद रामसिंह की 15 वर्षीय बेटी मनीषा 10 कक्षा में पढ़ती है और 12 वर्षीय बेटा अजय सातवीं क्लास में पढ़ता है।
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शहीद रामसिंह 22 जाट रेजिमेंट में हवलदार के पद पर तैनात थे। उनके शहीद होने की सूचना से गांव में माहौल गमहीन बना हुआ है। पत्नी और बच्चों के साथ परिवार के सदस्यों का रो रो कर बुरा हाल है। परिवार के सदस्य पथराई नम आंखों से शहीद के शव का इंतजार कर रहे हैं।
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शहीद रामसिंह के परिवार में तीन भाई है जिनमे रामसिंह सबसे बड़े थे और दोनों छोटे भाई खेती का काम करते हैं। जबकि उनके एक बेटा और बेटी है। शहीद रामसिंह की 15 वर्षीय बेटी मनीषा 10 कक्षा में पढ़ती है और 12 वर्षीय बेटा अजय सातवीं क्लास में पढ़ता है।
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फायरिंग के दौरान पैर फिसलने से हुई मौत
शहीद रामसिंह का पार्थिव शरीर ले जाते सेना के जवान
- फोटो : amar ujala
शहीद रामसिंह जुलाई महीने में छट्टियों पर घर आए थे और 11 अगस्त को एक माह की छुट्टी काट कर वापस जम्मू ड्यूटी पर गए थे। रामसिंह 2001 में सेना में भर्ती हुए थे। शहीद रामसिंह के भाई शीशराम ओर विक्रम ने बताया कि शनिवार सुबह 10 बजे के करीब जम्मू कश्मीर के लेह सेक्टर में हुई फायरिंग के दौरान रामसिंह का पैर फिसल गया था तभी उसे गंभीर अवस्था मे अस्पताल भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान दोपहर को उनकी मौत हो गई।
आर्मी हैडक्वार्टर से फोन पर उन्हें शहीद होने की सूचना मिली थी तभी से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
आर्मी हैडक्वार्टर से फोन पर उन्हें शहीद होने की सूचना मिली थी तभी से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।