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राजस्थान में नहीं होंगे बाल विवाह, सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान

Mon, 06 Mar 2017 02:10 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 06 Mar 2017 02:10 PM IST
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action plan by rajasthan to curb child marriages
डेमो इमेज - फोटो : amar ujala
राजस्थान में बाल विवाह की रोकथाम के लिए राजस्थान सरकार ने एक मजबूत एक्शन प्लान तैयार किया है। आपको बता दें कि राजस्थान अपने आप में ऐसा पहला प्रदेश होगा जो बाल विवाह रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगा। 
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जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत सरकार बाल विवाह,मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को रोकने और लोगों की सोच बदलने के लिए पंचायत, ग्रामीण स्तर पर कार्य करेगी। बताया गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के एक्शन प्लान के तहत समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ, भवन निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों को मुहैया कराते हुए करेगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार किशोर अवस्था में आने वाले लड़के—लड़कियों की जीवनशैली को सशक्त बनाया जाएगा ताकि उनमें कॅरिअर, स्किल जैसी चीजों में रूचि बढ़े। बताया यह भी गया है कि बाल विवाह को ट्रेक करने के लिए एक डेटा मैनेजमेंट सिस्टम भी बनाया जाएगा। 
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महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस एक्शन प्लान को प्रभावी तरीके से कार्यान्वित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी मदद मांगी है। विभाग प्रदेश के हर जिले में उच्च, मध्यम एवं निम्न स्तर के एक्शन प्लान बनाएगा जिन्हें जिलों के हिसाब से प्रशासनिक स्तर पर लागू किया जाएगा। 
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action plan by rajasthan to curb child marriages
डेमो इमेज - फोटो : Internet
इन कुरीतियों से नहीं बच पा रहा प्रदेश:

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार की गई एक्शन प्लान रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह,मृत्युभोज जैसी कई कुरीतियां ऐसी है जिन्हें आज भी लोग मानते हैं। इन कुरीतियों की वजह से ही समाज ना तो अपने आप को बदल पा रहा है और लोगों के विकास में भी इन वजहों से कई परेशानियां आ रही है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि अक्षय तृतीया, पीपल पूर्णिमा जैसे मौकों पर बाल विवाह के आंकड़े कई ज्यादा हैं। लोगों को मानना हैं कि ऐसे मुहुर्त पर ​बच्चों की शादी करने से संपन्नता आती है वहीं किसी व्यक्ति की मौत हो जाने पर 'भोज' यानी लोगों को खाना खिलाने की परंपरा भी चली आ रही है जिससे गरीब वर्ग काफी परेशान है। 'आटा साटा' नामक प्रथा के तहत तो दुल्हनें बदलने का भी प्रचलन है।

गौरतलब है इस तरह की योजना लाने वाले पहला प्रदेश राजस्थान ही है जहां बाल विवाह के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। ऐसे में यहां महिलाओं का विकास एवं सशक्तिकरण भी नहीं हो पा रहा है और ऐसी कुप्रथाओं से ही घरेलू हिंसा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। 
 
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