{"_id":"58f6e4e64f1c1bb446472169","slug":"zakir-naik-aide-spills-beans-on-benami-property-says-nia-on-tail","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेनामी संपत्ति पर नाइक के खिलाफ बयान दे सकता है एक करीबी, NIA के पास है सबूत","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बेनामी संपत्ति पर नाइक के खिलाफ बयान दे सकता है एक करीबी, NIA के पास है सबूत
amarujala.com- Presented by: राघवेंद्र मिश्र
Updated Wed, 19 Apr 2017 09:47 AM IST
विज्ञापन
zakir naik
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाईक की 100 करोड़ की बेनामी संपत्ति के मामले में उनका एक करीबी सहयोगी सीआरपीसी के सेक्शन 164 के अंतर्गत इकबालिया बयान दे सकता है। बताते चलें कि एनआईए ने पिछले साल जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के खिलाफ धन शोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों के अनुसार, एक अन्य मुख्य सहयोगी भी नाईक के खिलाफ बयान देने के लिए सहमत हो गया है। लेकिन, वह फ्रैक्चर से जूझ रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। एजेंसी का कहना है कि उनके पास पहले से ही नाईक के खिलाफ पूख्ता सबूत हैं। नाईक के गैरजमानती वारंट के लिए एनआईए जल्द ही कोर्ट भी जा सकती है।
बताते चलें कि इससे पहले एनबीडब्लू ने नाईक को सीआरपीसी के सेक्शन 82 के अंतर्गत 'घोषित अपराधी' के लिए एप्लिकेशन दिया है।
इससे पहले पिछले साल 17 नवंबर को सरकार की ओर से एक आदेश जारी करते हुए इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैर कानूनी संगठन घोषित कर दिया गया था। आरोप था कि इस संगठन आपराधिक गतिविधियों के संचालन के लिए दूसरी कंपनियां बना रखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों के अनुसार, एक अन्य मुख्य सहयोगी भी नाईक के खिलाफ बयान देने के लिए सहमत हो गया है। लेकिन, वह फ्रैक्चर से जूझ रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। एजेंसी का कहना है कि उनके पास पहले से ही नाईक के खिलाफ पूख्ता सबूत हैं। नाईक के गैरजमानती वारंट के लिए एनआईए जल्द ही कोर्ट भी जा सकती है।
विज्ञापन
बताते चलें कि इससे पहले एनबीडब्लू ने नाईक को सीआरपीसी के सेक्शन 82 के अंतर्गत 'घोषित अपराधी' के लिए एप्लिकेशन दिया है।
इससे पहले पिछले साल 17 नवंबर को सरकार की ओर से एक आदेश जारी करते हुए इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैर कानूनी संगठन घोषित कर दिया गया था। आरोप था कि इस संगठन आपराधिक गतिविधियों के संचालन के लिए दूसरी कंपनियां बना रखी है।
विज्ञापन