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कौन हैं युमनाम खेमचंद: RSS के करीबी, बने मणिपुर के मुख्यमंत्री; 2022 में भी थी इनके सीएम बनने की चर्चा

Wed, 04 Feb 2026 07:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 04 Feb 2026 07:17 PM IST
सार

2012 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले युमनाम खेमचंद 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। वे पार्टी के अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं और मणिपुर विधानसभा के स्पीकर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 

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Yumnam Khemchand Singh elected BJP Party Leader in Manipur to take oath as Chief Minister Profile news in hind
युमनाम खेमचंद सिंह - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

मणिपुर में बुधवार (4 फरवरी) को राष्ट्रपति शासन हटने के बाद एक नई सरकार का शपथग्रहण हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ भाजपा विधायक नेमचा किपगेन ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। किपगेन कुकी समुदाय से हैं। नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल डिखो ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। भाजपा के गोविंदास कोंथौजम और एनपीपी केके लोकेन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से डिजिटल माध्यम से शपथ ली।
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मणिपुर में आगामी 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला था। इससे पहले ही एनडीए में सरकार बनाने को लेकर कवायद तेज हो गई। इस बीच भाजपा विधायक दल की बैठक में मंगलवार को युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया। इसी के साथ युमनाम खेमचंद के मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।
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आइये जानते हैं युमनाम खेमचंद के बारे में...

कौन हैं युमनाम खेमचंद?

1. मणिपुर की राजनीति में अनुभवी नेता
युमनाम खेमचंद मणिपुर भाजपा के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। 62 वर्षीय युमनाम मौजूदा समय में मणिपुर की राजधानी इंफाल की सिंगजामेई सीट से विधायक हैं। खेमचंद 2012 से ही इस सीट से जीतते आ रहे हैं। हालांकि, उनकी शुरुआत तृणमूल कांग्रेस से हुई। 2012 में वे इसी पार्टी के टिकट पर पहली बार चुनाव जीते थे। 

बाद में युमनाम भाजपा में शामिल हो गए और 2017 और 2022 में लगातार इसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2017 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें मणिपुर विधानसभा का स्पीकर भी नियुक्त किया और वे राज्य में भाजपा की सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले नेता बने।



युमनाम बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी बने। बताया जाता है कि 2022 के विधानसभा चुनाव, जिसमें भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं, उसके नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में होड़ मच गई थी। दरअसल, एन बीरेन सिंह को तब भाजपा के दूसरे नेता थोंगम बिस्वजीत सिंह से चुनौती मिली थी। इस दौरान खबरें आई थीं कि भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को भी दिल्ली बुलाया है और मुख्यमंत्री के तौर पर उनके नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि, बाद में एन. बीरेन सिंह ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और सीएम पद अपने पास रखने में कामयाब हुए। बीरेन सिंह सरकार में खेमचंद को शिक्षा, आवास विकास, निकाय प्रशासन समेत कई मंत्रालय सौंपे गए। 



ये भी पढ़ें: Manipur New CM: युमनाम खेमचंद बनेंगे मणिपुर के नए मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक दल की बैठक में लिया गया फैसला 
 

2. ताइक्वांडो में खास उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय
युमनाम खेमचंद सिंह एक 5वीं डैन (5th Dan) ब्लैक बेल्ट ताइक्वांडो मास्टर हैं और उन्हें भारत में इस मार्शल आर्ट को लोकप्रिय बनाने वाले प्रमुख लोगों से एक माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 1978 में 16 वर्ष की आयु में ताइक्वांडो सीखना शुरू किया था। वह 1990 में ताइक्वांडो की बारीकियां सीखने के लिए सियोल, दक्षिण कोरिया गए, जिसे वह इस खेल का 'पावन स्थान' मानते हैं। उन्होंने सियोल की वर्ल्ड ताइक्वांडो एकेडमी, कुक्कीवोन से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

उन्हें ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन (GTTF) की ओर से पारंपरिक ताइक्वांडो शैली में 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया है। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने 1982 में ऑल-असम ताइक्वांडो एसोसिएशन की स्थापना की और इसके संस्थापक अध्यक्ष रहे। वह भारत में ताइक्वांडो को लोकप्रिय बनाने और 'ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया' के गठन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं, जहां उन्होंने उपाध्यक्ष के तौर पर कार्य किया।

उन्हें मणिपुर में इस मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने वाले शुरुआती लोगों में गिना जाता है। बताया जाता है कि 1980 के दशक में उन्होंने खुद ताइक्वांडो में ट्रेनिंग हासिल करने के बाद असम पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण दिया था। 

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3. मणिपुर हिंसा के बाद हुआ उभार
मणिपुर हिंसा के दौरान और उसके बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने राहत कार्यों, शांति प्रयासों और राजनीतिक स्थिरता बहाल करने में अहम भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर खेमचंद ने केंद्र सरकार से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के लिए 7,000 घर बनाने का एक विशेष पैकेज हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने राजधानी इंफाल के एक कॉलेज में सात महीनों से अधिक समय तक मैतेई समुदाय के विस्थापितों के लिए एक राहत शिविर का भी संचालन किया। खेमचंद को मैतेई-कुकी के बीच टकराव से फैली हिंसा से प्रभावित सेरौ और सुगनु जैसे क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित रूप से उनके गांवों में वापस लौटने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है।

मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के दो साल बाद जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा तो वे पहले ऐसे प्रमुख मैतेई विधायक रहे जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों (उखरुल और कामजोंग) में स्थित कुकी राहत शिविरों का दौरा किया। उन्होंने इसे शांति की ओर एक छोटा लेकिन अहम कदम बताया। इस दौरान उन्होंने मैतेई समुदाय से आग्रह किया कि वे वर्तमान संकट को सुलझाने के लिए बड़े भाई की भूमिका निभाएं और कुकी समुदाय के साथ विश्वास की कमी को दूर करें।

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