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Hindi News ›   India News ›   Yogi Adityanath unveiled Ram statue in Ayodhya, people asked- When will Ram temple be made

अयोध्या में योगी आदित्यनाथः राम की प्रतिमा का किया अनावरण, रामभक्तों का सवाल- मंदिर कब बनेगा?

Fri, 07 Jun 2019 07:36 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Fri, 07 Jun 2019 07:36 PM IST
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Yogi Adityanath unveiled Ram statue in Ayodhya, people asked- When will Ram temple be made
भाजपा के संकल्प पत्र में राममंदिर - फोटो : Amar Ujala
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या में भगवान राम की काष्ठ की सात फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। वे यहां स्वामी नृत्य गोपाल दास के जन्मदिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इसके बाद 15 जून को संतों की एक धर्म संसद का भी आयोजन किया जाना है। इन सबके बीच राममंदिर के लिए प्रयासरत लोगों ने सरकार से सवाल करना शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण के लिए सरकार को अब किसका इंतजार है? इसके पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा नेता सुब्रामण्यम स्वामी और शिवसेना ने भी कहा है कि राममंदिर का निर्माण का समय आ चुका है और भाजपा को अपना वायदा निभाने के लिए अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। 
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क्या भाजपा राममंदिर के लिए कोई पहल करेगी? 

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) में भी राममंदिर बनवाने का वायदा किया है लेकिन इसके लिए उसने संवैधानिक प्रावधानों के पालन का ही रास्ता उचित बताया है। यानी जब तक मामला सर्वोच्च अदालत में है, सरकार इसके लिए अपनी तरफ से कोई पहल नहीं करेगी। लेकिन कोर्ट की तरफ से कोई आदेश आने के बाद ही वह विकल्पों की तलाश करेगी। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, भाजपा सत्ता के केंद्र में है, इसलिए संवैधानिक व्यवस्थाओं का संरक्षण करना उनका सबसे बड़ा दायित्व है। सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ेगी। हालांकि, कोर्ट के निर्देश के मुताबिक इसके लिए सभी पक्षों के बीच एक समझौता कराने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा। 
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राममंदिर निर्माण के न्यास से जुड़े रामविलास वेदांती ने कहा है कि राममंदिर निर्माण के लिए उन्हें भाजपा और शिवसेना पर ही भरोसा है। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा और शिवसेना को लेकर कोई भ्रम नहीं है क्योंकि वैचारिक रूप से दोनों दल एक जैसे हैं। लेकिन सरकार को यह कार्य जल्द से जल्द करना चाहिए क्योंकि रामभक्त इसके लिए वर्षों से इंतजार करते आ रहे हैं। 
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सरकार को किसका डर? 

दरअसल, एनडीए खेमे में अभी भी कई ऐसे दल हैं जिनके वोट बैंक के लिहाज से राममंदिर का एजेंडा उन्हें सूट नहीं करता है। इसमें बिहार के जदयू के साथ-साथ रामविलास पासवान भी शामिल हैं। चूंकि बिहार विधानसभा चुनाव के लिहाज से सियासी चालें चलने की कवायद शुरू हो चुकी है, ऐसे में भाजपा अपने इन साथियों को दूर नहीं जाने देना चाहेगी। इसीलिए वह ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहती जिससे उसके साथियों को कोई 'बहाना' मिले। हालांकि, भाजपा इस समय केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है। संसद में बहुमत के लिए उसे दूसरे दलों पर निर्भर रहने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बाद भी वह अपने साथियों को नाराज नहीं करना चाहती। 

तो क्यों उठ रहा राममंदिर मुद्दा? 

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस, शिवसेना और भाजपा के नेताओं के राममंदिर पर दिए बयानों को उनकी सियासी चाल बताया है। संगठन के मुताबिक अक्टूबर में महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा के चुनाव हैं। इसलिए वोटरों को अपने पाले में खींचने के लिए संघ परिवार फिर से राम राग अलाप रहा है, जबकि उन्हें भी मालूम है कि संवैधानिक स्थितियों में इस समय राममंदिर पर कोई भी कानून नहीं लाया जा सकता।
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