कर्नाटक: येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री की शपथ तो ले ली, अब 31 जुलाई तक पास करें परीक्षा
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20 दिन के बाद कर्नाटक को बीएस येदियुरप्पा के रूप में नया मुख्यमंत्री मिल गया। येदियुरप्पा ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है, लेकिन विरोधी दलों की हरकत भी बड़ी चुगली का संकेत कर रही है। कांग्रेस पार्टी ने बीएस येदियुरप्पा को शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित करने के राज्यपाल के फैसले की आलोचना की है। इसी के साथ सूचना है कि जद(एस) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी अपने अपमान का बदला लेने की कोशिश में जुट गए हैं।
कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना आसान है। मई 2018 में बहुमत न होने के बाद भी येदियुरप्पा ने शपथ ले ली थी और बहुमत न साबित कर पाने की स्थिति में इस्तीफा दे दिया था। कर्नाटक से जुड़े नेता का कहना है कि येदियुरप्पा ने फिर शपथ ले ली है। उनका स्वागत है। लेकिन उन्हें 31 जुलाई को बहुमत साबित करना है। सूत्र का कहना है कि यह भी एक कठिन परीक्षा है। इतनी हड़बड़ी में चल रही भाजपा और उसके नेता येदियुरप्पा के लिए देखना है कि पास हो पाते हैं?
फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष केआर कुमार रमेश हैं
कर्नाटक विधानसबा के अध्यक्ष केआर कुमार रमेश हैं। रमेश को लेकर भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के भविष्य को लेकर फैसला बीएस येदियुरप्पा, कर्नाटक के विधायकों, स्थानीय ईकाई को करना है। नड्डा के अनुसार जो रमनीतिक रूप से उचित होगा, वह किया जा सकता है। नड्डा की इस टिप्पणी से साफ है कि भाजपा विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार की भूमिका को लेकर असमंजस में है। केआर रमेश कुमार तीन बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर चुके हैं। अभी उन्हें 14 विधायकों पर अपना निर्णय लेना है। इनमें 11 कांग्रेसी और तीन जद(एस) के विधायक हैं। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों की अयोग्यता का निर्णय लिया जाना भी एक बड़े संकेत की तरह है। ऐसे 31 जुलाई तक बीएस येदियुरप्पा के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी रहेगी।
क्या रहेगी कांग्रेस और जद(एस) की रणनीति
कांग्रेस और जद(एस) दोनों दल एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने को पराजय की तरह ले रहे हैं। कांग्रेस और जद(एस) के पास कुल 99 विधायकों का समर्थन है। एक विधायका बसपा का है। वह भी समर्थन दे सकता है। भाजपा के पास कुल 106 विधायकों का अभी समर्थन है। ऐसे में दोनों दलों की रणनीति एक बार फिर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को विधानसभा में बड़ी हार दिखाने का मन बना रहे हैं। माना जा रहा है कि 31 जुलाई तक अभी कई समीकरण बनने-बिगड़ने के संकेत हैं।