फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Year Ender 2024 India's Achievement in Science Pushpak Landing to Proba-3 Mission EOS-8 mission

Year Ender 2024: 'पुष्पक' की लैंडिंग से लेकर प्रोबा-3 और ईओस-8 तक, विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने छुईं ऊचाइयां

Sun, 29 Dec 2024 08:23 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 29 Dec 2024 08:23 AM IST
सार

इसरो ने 2024 की शुरुआत ही सफलता के साथ की थी। जनवरी में इसरो ने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल तकनीक (प्रक्षेपण यान को दोबारा इस्तेमाल इस्तेमाल करने की तकनीक ) का सफल परीक्षण किया। आइये जानते हैं भारत ने अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में इस साल कौन कौन सी उपलब्धियां हासिल कीं....

विज्ञापन
Year Ender 2024 India's Achievement in Science Pushpak Landing to Proba-3 Mission EOS-8 mission
इयर एंडर। - फोटो : अमर उजाला
loader

विस्तार

साल 2024 खत्म होने में महज कुछ ही दिन शेष हैं। बीत रहा यह साल कई मोर्चों पर भारत का साबित हुआ। इस वर्ष की कई घटनाओं, विकास, आर्थिक प्रगति और नई शुरुआतों ने नये रूप लेते भारत को पारिभाषित किया। अंतरिक्ष, अर्थव्यवस्था, राजनीति, मनोरंजन और खेलों से लेकर हमारी जीवन शैली तक ने नई विशिष्टताएं और कई उपलब्धियां हासिल कीं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में जहां भारत ने बीते साल चंद्रमा पर  ऐतिहासिक लैडिंग की तो वहीं इस साल अंतरिक्ष दिवस मनाने की शुरुआत कर उस सफलता का जश्न हर साल मनाने की पहल भी की। इतना ही नहीं इसरो ने 2024 की शुरुआत ही सफलता के साथ की थी। जनवरी में इसरो ने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल तकनीक (प्रक्षेपण यान को दोबारा इस्तेमाल इस्तेमाल करने की तकनीक ) का सफल परीक्षण किया। आइये जानते हैं भारत ने अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में इस साल कौन कौन सी उपलब्धियां हासिल कीं....

विज्ञापन

ब्लैक होल की स्टडी के लिए XpoSAT का सफल प्रक्षेपण
भारत ने साल 2024 की शुरुआत खगोल विज्ञान के सबसे बड़े रहस्यों में से एक ब्लैक होल के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उपग्रह भेज कर की। एक जनवरी 2024 को सुबह 9.10 बजे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के इस पहले एक्स-रे पोलरीमीटर उपग्रह यानी ‘एक्सपोसैट’ को रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) सी 58 के जरिए लॉन्च किया गया था। इस मिशन में एक्सपोसैट के साथ साथ 10 अन्य उपग्रह भी पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए गए थे। इसरो का पहला एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) एक्स-रे स्रोत के रहस्यों का पता लगाने और ‘ब्लैक होल’ की रहस्यमयी दुनिया का अध्ययन करने में मदद करेगा।

क्यों खास है ये मिशन?
इसरो के मुताबिक, इस उपग्रह का लक्ष्य सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली गहन एक्स-रे का पोलराइजेशन यानी ध्रुवीकरण पता लगाना है। यह किस आकाशीय पिंड से आ रही हैं, यह रहस्य इन किरणों के बारे में काफी जानकारी देते हैं। पूरी दुनिया में एक्स-रे ध्रुवीकरण को जानने का महत्व बढ़ा है। यह पिंड या संरचनाएं ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे (तारे में विस्फोट के बाद उसके बचे अत्यधिक द्रव्यमान वाले हिस्से), आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद नाभिक आदि को समझने में मदद करता है। इससे आकाशीय पिंडों के आकार और विकिरण बनाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

भारत के पहले रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV) तकनीक का तीसरा सफल परीक्षण
जनवरी 2024 में ही इसरो ने एक और उपलब्धि हासिल की। इसरो ने 23 जनवरी को रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल का तीसरा और अंतिम परीक्षण कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में सुबह 7.10 बजे किया गया। इससे पहले इसरो रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल के दो सफल परीक्षण कर चुका है। तीसरे परीक्षण में प्रक्षेपण यान को ज्यादा ऊंचाई से छोड़ा गया और इस दौरान तेज हवाएं भी चल रहीं थी, इसके बावजूद प्रक्षेपण यान 'पुष्पक' ने पूरी सटीकता के साथ रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की। 

चिनूक हेलीकॉप्टर से हवा में छोड़ा गया प्रक्षेपण यान 'पुष्पक'
परीक्षण के दौरान वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से प्रक्षेपण यान पुष्पक को साढ़े चार किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ा गया। इसके बाद प्रक्षेपण यान पुष्पक ने स्वायत तरीके से रनवे पर सफल लैंडिंग की। लैंडिंग के दौरान यान की गति करीब 320 किलोमीटर प्रतिघंटे थी। बता दें कि एक कमर्शियल विमान की लैंडिंग के वक्त स्पीड 260 किलोमीटर प्रतिघंटे और एक लड़ाकू विमान की गति करीब 280 किलोमीटर प्रतिघंटे होती है। लैंडिंग के वक्त पहले ब्रेक पैराशूट की मदद से प्रक्षेपण यान की गति को घटाकर 100 किलोमीटर प्रतिघंटे पर लाया गया और फिर लैंडिंग गीयर ब्रेक की मदद से रनवे पर विमान को रोका गया। 

विज्ञापन

प्रोबा-3 मिशन
इसरो ने पांच दिसंबर को पीएसएलवी रॉकेट से यूरोपीय स्पेस एजेंसी के प्रोबा-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, इसरो पीएसएलवी-सी59 को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रोबा-3 उपग्रहों के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। ईओएस-08 प्रक्षेपण के साथ इसरो का मिशन सफल रहा।

1,778 करोड़ का आया है खर्च
प्रोबा-3, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसओ) के प्रोबा सीरीज का तीसरा सोलर मिशन है। खास बात ये है कि प्रोबा सीरीज के पहले मिशन को भी इसरो ने ही 2001 में लॉन्च किया था। प्रोबा-3 मिशन के लिए स्पेन, बेल्जियम, पोलैंड, इटली और स्विट्जरलैंड की टीमों ने काम किया है। इस पर करीब 20 करोड़ यूरो (करीब 1,778 करोड़ रुपये) का खर्च आया है।

सूर्य के कोरोना का अध्ययन करेगा प्रोबा-3
प्रोबा-3 मिशन के जरिए वैज्ञानिक सूर्य के अंदरूनी और बाहरी कोरोना के बीच बने काले घेरे का अध्ययन करेंगे। सूर्य के कोरोना का तापमान 20 लाख डिग्री फेरनहाइट तक जाता है। किसी उपकरण की मदद से इसका अध्ययन करना मुमकिन नहीं होता है। प्रोबा-3 के दो सैटेलाइट कोरोनाग्राफ (310 किग्रा) और ऑकल्टर (240 किग्रा) मिलकर सूर्यग्रहण की नकल बनाएंगे। इससे सूर्य से निकलने वाली तीव्र रोशनी को रोका जा सकेगा और ऐसा करने से सूर्य के कोरोना का अध्ययन करना भी आसान हो जाएगा। वैज्ञानिक पता लगाएंगे कि आखिर सूर्य के कोरोना का तापमान उसकी सतह से इतना अधिक क्यों होता है।

इनसेट 3डीएस...मनमौजी मौसम का मूड भांपने की कवायद
साथ ही फरवरी में भी भारत ने दुनिया को अपनी लगन और मेहनत का लोहा मनवाया। दरअसल, फरवरी में इसरो ने मौसम-विज्ञान उपग्रहों की सीरीज इनसेट 3 के तहत इनसेट 3डीएस का न सिर्फ सातवां सफल प्रक्षेपण किया  बल्कि  इसे पृथ्वी की जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित करने में भी सफलता हासिल की। जियोसिंक्रोनस कक्षा में एक नाक्षत्र दिवस 23 घंटे, 56 मिनट और 4 सेकेंड के बराबर होता है। जिसमें सैटेलाइट की कक्षा पृथ्वी के घूर्णन के समान हो जाती है। ये कक्षा गोलाकार या गैर-गोलाकार प्रकार की हो सकती है। 

इसरो की सैटेलाइट इनसैट-3डीएस को 17 फरवरी 2024 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। इनसैट-3डीएस को जीएसएलवी एफ-14 लॉन्च व्हीकल से अंतरिक्ष में भेजा गया था। जीएसएलवी-एफ14 को नॉटी बॉय के नाम से भी जाना जाता है। यह उपग्रह शृंखला अनिश्चित मौसम के बेहतर पूर्वानुमान और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने में मदद करती है। साल 2003 में इनसेट 3ए से शुरुआत हुई और 2016 में पिछला प्रक्षेपण इनसेट 3डीआर का हुआ। पिछला उपग्रह 2026 तक काम करने के लिए बना था। अब 907 किलो वजनी इनसेट 3डीएस मिशन 2030 तक काम करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed