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साल रहा बेहालः कोरोना के आगे लाचार दिखी दुनिया, सामाजिक सद्भाव ने संकट में जगाई उम्मीद

Sun, 27 Dec 2020 12:36 AM IST
योगेश साहू अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 27 Dec 2020 12:36 AM IST
सार

  • कोरोना के कारण देश में अब तक जा चुकी 1.47 लाख लोगों की जान, सक्रिय केसों के घटने से चिंता घटी तो नए स्ट्रेन ने चिंता बढ़ाई, वैक्सीन के आने का बेसब्री से इंतजार
  • इस साल जेएनयू, जामिया में छात्रों का संघर्ष जारी रहा तो शाहीन बाग के प्रदर्शन से शुरू हुए साल का अंत किसान आंदोलन के साथ होने जा रहा

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Year Ender 2020 : It Was A Rough year, World Looked Helpless In Front Of Corona, Social Harmony Raised Hope In Crisis
coronavirus - फोटो : PTI

विस्तार

देश में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को केरल में सामने आया था। तब से अब तक देश में कोरोना के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं तो 1 लाख 47 हजार 379 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा राहत की बात यह है कि देश में कोरोना के कुल सक्रिय मामलों की संख्या में लगातार कमी आई है। अब यह 2.80 लाख ही बची है। महाराष्ट्र और दिल्ली इससे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहे।

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इस बीच आने वाले साल में टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उम्मीद है कि इस बीमारी से जल्दी ही लोगों को मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि वैक्सीन लेने के बाद भी शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने के नियमों का पालन करना सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक होगा।
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लॉकडाउन के कारण देश को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। इसके कारण करोड़ों लोगों की नौकरी चली गई तो परिवार चलाने के लिए लाखों लोगों को भयानक संघर्ष करना पड़ा। केंद्र-राज्य और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मदद का अनोखा इतिहास रचा और भूखे लोगों तक भोजन पहुंचाने के मामले में दुनिया ने अद्भुत सामाजिक कार्य देखा तो देश की अर्थव्यवस्था अभी भी पटरी पर वापस आने के लिए संघर्ष कर रही है।
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24 मार्च को लगा था पहला लॉकडाउन...
24 मार्च 2020 से देश में पहले लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। इसके बाद इसे चार चरणों में बढ़ाया गया। 1 जून से देश के अलग-अलग हिस्सों को अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने कोरोना के खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 22 मार्च रविवार शाम पांच बजे थाली, शंख बजाने का अनुरोध किया था। इस कार्यक्रम को जनता का भारी साथ मिला। अरविंद केजरीवाल ने 31 मार्च तक के लिए लॉक डाउन की घोषणा कर दी थी।

दिल्ली में कोरोना

दिल्ली सरकार ने कोरोना की फास्ट टेस्टिंग को अपनी रणनीति का अभिन्न अंग बनाया जिसके कारण कोरोना के ज्यादा से ज्यादा लोगों की सटीक पहचान हो सकी। उनका समय पर इलाज किया गया और अन्य लोगों तक संक्रमण पहुंचने से रोका जा सका। दिल्ली में पहला मामला 2 मार्च 2020 को सामने आया था। अब तक दिल्ली में कोरोना के कुल 6,21.439 मामले सामने आ चुके हैं। इस समय केवल 7267 मामले ही सक्रिय बचे हुए हैं। 6.03 लाख लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं तो 10,414 लोगों को कोरोना के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है।

टेस्टिंग दिल्ली सरकार की सबसे कारगर रणनीति रही है। अब तक कोरोना के कुल 82.08 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं। कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या अब 1.2 प्रतिशत तक ही रह गई है। कोरोना के मामलों में वृद्धि दर भी गिरकर 0.2 प्रतिशत ही रह गई है।

29 मार्च से आनंद विहार पर लोगों की भारी भीड़ इकट्ठी हुई। भूखे-प्यासे लोगों को बीवी-बच्चों के साथ बदहाल देखकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। निजामुद्दीन के मरकज में जमा हुए तब्लीगी जमात के लोगों को शुरूआती दौर में कोरोना के सबसे बड़े वाहक के रूप में देखा गया। नियमों को तोड़ने के आरोप में कई लोगों पर केस भी चले। लेकिन अंत में कोर्ट ने सबको बरी कर दिया। कुछ लोगों को जुर्माने की रकम भरनी पड़ी थी। 

कर्नाटक में कोरोना से हुई देश में पहली मौत 

कलबुर्गी, कर्नाटक के 76 वर्षीय व्यक्ति को देश में कोरोना से हुई पहली मौत माना जाता है। उनकी मृत्यु 10-11 मार्च को हुई थी। वहीं, 13 मार्च को विदेश से आए एक बेटे से संक्रमित महिला की दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई थी। इसे दिल्ली में कोरोना से हुई पहली मौत माना जाता है। 12 मार्च को अरविंद केजरीवाल ने इसे महामारी घोषित कर दिया था।

कुछ अन्य घटनाएं
इस साल दिल्ली में कुछ अन्य ऐसी घटनाएं घटीं जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन, परिसर में हिंसा जैसी घटनाएं भी शामिल रहीं। 5 जनवरी को देर शाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ नकाबपोश लोग डंडे लेकर घुसे। पढ़ाई कर रहे छात्रों की पिटाई की।

लेफ्ट लॉबी ने इसके लिए एबीवीपी छात्रों को जिम्मेदार ठहराया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने बीते साल अपने साथ हुई हिंसा के विरोध में लगातार मशाल जलाए रखी तो जगह-जगह पर इसके विरोध में प्रदर्शन होते रहे। इसके अलावा दिल्ली की सत्ता पर रिकॉर्ड बहुमत से अरविंद केजरीवाल की वापसी हुई। दिल्ली कांग्रेस को चौधरी अनिल कुमार और दिल्ली बीजेपी को आदेश गुप्ता के रूप में नए अध्यक्ष मिले।

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