{"_id":"61e590a3fb926854282d7de8","slug":"wrong-precedent-to-criticise-centre-for-states-tableaux-exclusion-govt-sources","type":"story","status":"publish","title_hn":"Republic Day Parade 2022: झांकियां खारिज होने से बिफरे बंगाल, केरल और तमिलनाडु, सरकार ने दिया यह जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Republic Day Parade 2022: झांकियां खारिज होने से बिफरे बंगाल, केरल और तमिलनाडु, सरकार ने दिया यह जवाब
Mon, 17 Jan 2022 09:24 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क/ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क/ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 17 Jan 2022 09:24 PM IST
सार
केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा केंद्र और राज्यों के बीच विवाद को दिखाने के लिए अपनाया गया एक गलत उदाहरण है।
विज्ञापन
राज्यों की झांकियां (file photo)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कुछ राज्यों इस आरोप पर कि गणतंत्र दिवस परेड से उनकी झांकी को हटा दिया गया है, केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा कि यह एक गलत मिसाल है। इसने जोर देकर कहा कि केंद्र नहीं बल्कि एक विशेषज्ञ समिति इस संबंध में निर्णय लेती है। केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के प्रस्तावों को विषय विशेषज्ञ समिति ने उचित प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद खारिज किया है।
विज्ञापन
राज्यों द्वारा विवाद को दिखाने का गलत तरीका
केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा केंद्र और राज्यों के बीच विवाद को चित्रित करने के लिए अपनाया गया एक गलत उदाहरण है। यह देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों से कुल 56 प्रस्ताव आए थे और इनमें से 21 को शॉर्टलिस्ट किया गया था। सूत्रों ने कहा कि समय की कमी को देखते हुए स्वीकृत प्रस्तावों की तुलना में अधिक प्रस्तावों को खारिज करना स्वाभाविक है।
विज्ञापन
सीएम ममता और स्टालिन ने लिखा पीएम को पत्र
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी कहा कि चयन की इसी तरह की प्रक्रिया हर साल अपनाई जाती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने राज्यों की झांकियों को हटाने का विरोध करते हुए हस्तक्षेप की मांग की है। स्टालिन ने कहा कि झांकी को हटाने से तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं और देशभक्ति की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचेगी।
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल की झांकी को शामिल नहीं किए जाने पर हैरानी जताते हुए बनर्जी ने कहा कि इस तरह के कदम से उनके राज्य के लोगों को चोट पहुंचेगी। केरल में कई राजनेताओं ने भी झांकी को बाहर करने का मुद्दा उठाकर केंद्र की आलोचना की है। एक सूत्र ने आगे कहा कि यह स्पष्ट रूप से क्षेत्रीय गौरव से जुड़ा हुआ है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य के लोगों के अपमान के रूप में पेश किया गया है। ऐसा सिलसिला लगभग हर साल चलता है। यह राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा अपनाई गई एक गलत मिसाल है।
राजनीतिक नहीं, अन्य कारणों से नहीं मिली मंजूरी : केंद्र
गणतंत्र दिवस परेड में पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु की झांकियों को अस्वीकार किए जाने पर उपजे विवाद के बीच सरकार ने इसे राज्य सरकारों का निजी एजेंडा करार दिया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि ये राज्य सरकारें जानबूझ कर विवाद खड़ा कर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है।
सरकारी सूत्र ने कहा कि इस विवाद को मोदी सरकार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। हकीकत यह है कि झांकी के प्रस्ताव को विशेषज्ञ समिति तय करती है। मसलन इस साल प्राप्त 56 में से महज 21 प्रस्तावों को ही स्वीकृति मिली। वहीं, केरल की झांकी को 2018 और 2021 में स्वीकार किया गया।
तमिलनाडु की झांकी को 2016, 2017 में उसी मोदी सरकार के कार्यकाल में मंजूरी मिली जिस पर राज्य का अपमान करने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी तरह पश्चिम बंगाल की झांकी को 2016, 2017, 2019 और 2021 में मंजूरी मिली। ऐसे में इसे राज्य के अपमान से जोडऩा उचित नहीं है।