Wrestlers: कुरुक्षेत्र में निशाने पर लगा CM योगी का बाण! किसान आंदोलन जैसी 'गर्मी' दिखाने से बचीं खाप पंचायतें
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई की मांग कर रहे पहलवानों की लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इस पर विचार करने के लिए शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में खाप पंचायतें जुटी थीं। किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को 9 जून तक का अल्टीमेटम दे दिया है। अगर इस अवधि में बृजभूषण शरण की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पहलवानों को लेकर खाप पंचायतें खुद जंतर-मंतर पर पहुंच जाएंगी। यह माना जा रहा था कि खाप पंचायत में कोई 'एक्शन' से भरपूर निर्णय लिया जाएगा। जैसे रेलवे लाइन या सड़क मार्ग बाधित करना, दिल्ली में हरियाणा और यूपी के रास्ते जो खाद्य पदार्थ, दूध व सब्जी आदि की सप्लाई होती है, उसे रोक देना। ऐसा कुछ नहीं हुआ। पंचायत में सॉफ्टकार्नर का भाव दिखा। इसी वजह से सरकार को अल्टीमेटम दे दिया। इस दोतरफा सॉफ्टकार्नर का दूसरा पहलू उत्तर प्रदेश के अयोध्या में होने वाली सांसद बृजभूषण शरण सिंह की रैली का स्थगित होना रहा। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी ने जो अचूक बाण चलाया, वह कुरुक्षेत्र की खाप पंचायत में सही निशाने पर जाकर लगा।
यह भी पढ़ें: Brij Bhushan Singh: ब्रजभूषण की रैली क्यों हुई रद्द, क्या योगी हुए नाराज, चिट्ठी में भाजपा सांसद ने क्या कहा?
कई मुद्दों पर नजर आई आधी अधूरी सहमति
उत्तर प्रदेश के सोरम (मुजफ्फरनगर) में गुरुवार को खाप पंचायत हुई थी। इसमें हरियाणा और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। हालांकि पंचायत खत्म होने के बाद वहां पर कोई निर्णय नहीं सुनाया गया, बल्कि ये कहा गया कि शुक्रवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जो खाप पंचायत होगी, उसमें अंतिम निर्णय बताया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के एक पूर्व सदस्य बताते हैं, देखिये इस मामले में सब कुछ सर्वसम्मति से नहीं हो रहा है। जंतर मंतर पर धरना हो, नए संसद भवन के उद्घाटन वाले दिन संसद के सामने जाकर पहलवानों द्वारा प्रदर्शन करने की जिद हो या गंगा में मेडल बहाने का निर्णय, इनमें आधी अधूरी सहमति नजर आई थी। सोरम (मुजफ्फरनगर) में हुई पंचायत को लेकर हरियाणा की सभी खाप पंचायतें खुश नहीं थी। वजह, मीडिया में टिकैत बंधुओं और उत्तर प्रदेश ही दिखाया जा रहा था। यही कारण था कि मुजफ्फरनगर की पंचायत में जब फाइनल 'निर्णय' बताने की बारी आई तो कहा गया, कुरुक्षेत्र की पंचायत में इसका खुलासा किया जाएगा।
जनचेतना महारैली स्थगित होना बृजभूषण का फैसला नहीं
इस घोषणा के बाद दोनों पक्ष यानी भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह और खाप पंचायत, सक्रिय हो गए। यह माना गया कि कुरुक्षेत्र की पंचायत में संघर्ष का बिगुल बज उठेगा। दूसरी ओर बृजभूषण शरण सिंह ने भी पांच जून को अयोध्या में जनचेतना महारैली की तैयारियां तेज कर दीं। मीडिया में ऐसे बयान आने लगे कि इस रैली में दस लाख लोगों को शामिल कर बृजभूषण शरण सिंह, शक्ति प्रदर्शन करेंगे। जैसे ही कुरुक्षेत्र में खाप पंचायतों की बैठक शुरू हुई, तो उसी वक्त बृजभूषण शरण सिंह की रैली को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आ गया। उसमें सांसद बृजभूषण के हवाले से कहा गया कि जनचेतना महारैली कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दी गई है। अभी दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। यह एक बड़ा घटनाक्रम था। जानकारों का कहना है कि जनचेतना महारैली का स्थगित होना, यह सांसद बृजभूषण का फैसला नहीं था। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हस्तक्षेप रहा है। जिला प्रशासन की ओर से बृजभूषण सिंह की रैली को मंजूरी नहीं दी गई। जब यह खबर मीडिया में आई तो कुरुक्षेत्र की खाप पंचायत में भी इस मामले को लेकर सॉफ्टकॉर्नर नजर आया। पंचायत ने भी कह दिया कि अभी हम नौ जून तक इंतजार करेंगे। तब तक बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो खाप पंचायतें, पहलवानों के साथ जंतर मंतर पर पहुंच जाएंगी।
ये तय है कि पहलवानों को न्याय दिलाकर रहेंगे
किसान नेता नरेश टिकैत ने पहलवानों को गंगा में मेडल बहाने से रोक दिया था। उन्होंने इस मामले में पहलवानों से पांच दिन का समय मांगा था। पहलवानों के इस आंदोलन में शामिल लोगों के बीच मतभेद होने की खबरें आईं। राजनीतिक दलों द्वारा इस आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास भी हुआ। 28 मई को नए संसद भवन के बाहर पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त मतभेद रहा। इस बाबत दो समूह बन गए। एक का कहना था कि नए संसद भवन का उद्घाटन एक एतिहासिक दिन है, इसमें बाधा डालना ठीक नहीं है। इसके बावजूद पहलवानों ने संसद भवन की ओर जाने का प्रयास किया। इस बीच एक नाबालिग शिकायतकर्ता के बालिग होने की बात सामने आई। इससे बृजभूषण पर लगा पॉक्सो एक्ट हटने की संभावना बनती दिखी। शिकायतकर्ता पहलवान के परिजनों ने दूसरे पहलवानों पर कई आरोप लगा दिए। इस बात पर भी खाप पंचायत में चर्चा हुई थी। कुरुक्षेत्र में आयोजित महापंचायत की अध्यक्षता कर रहे सूबे सिंह समैण के एक करीबी ने बताया, सरकार को 9 जून तक का समय दिया है। ये सभी हरियाणा के पहलवान हैं। दिल्ली पुलिस जांच कर रही है। संभव है कि 9 जून तक कोई रिपोर्ट आ जाए। ये तय है कि पहलवानों को न्याय दिलाकर रहेंगे। सरकार ने तय अवधि में कुछ नहीं किया तो गांव-गांव में आंदोलन होगा। बेटियों को न्याय दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।