Wrestlers Protest: पहलवानों के मेडल राष्ट्रपति को सौंपे जा सकते हैं या लगेगी तमगों की वैश्विक बोली?
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विस्तार
भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कार्रवाई की मांग कर रहे पहलवान पीछे नहीं हटेंगे। 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन वाले दिन जब पहलवान, जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ रहे थे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। हालांकि कुछ घंटे बाद पहलवानों को छोड़ दिया गया। इसके बाद पहलवानों ने निर्णय लिया कि वे अपने मेडल 30 मई को हरिद्वार पहुंचकर गंगा में बहा देंगे। किसान नेता नरेश टिकैत ने पहलवानों को यह कह कर मेडल बहाने से रोक लिया था कि उन्हें पांच दिन का समय दें। इस दौरान मामले का कोई हल निकाल लिया जाएगा। बुधवार सुबह किसान नेता राकेश टिकैत ने फोन पर हुई बातचीत में कहा, एक जून को सोरम (मुजफ्फरनगर) में खाप पंचायत बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति तय होगी। हालांकि पहलवानों के पास राष्ट्रपति को अपने मेडल सौंपने या वैश्विक स्तर पर 'तमगों' की बोली लगाने का विकल्प खुला है।
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राकेश टिकैत का कहना है कि सोरम (मुजफ्फरनगर) में गुरुवार को खाप पंचायत बुलाई गई है। इसमें लोगों की भीड़ नहीं रहेगी। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समाज के वरिष्ठ लोग रहेंगे। किसान नेता भी पंचायत में शिरकत करेंगे। वहां पर पहलवानों के मामले में सर्वसम्मति से कोई फैसला लिया जाएगा। नरेश टिकैत ने हरिद्वार में पहुंचकर पहलवानों को मेडल न बहाने से रोक लिया था। अब पहलवानों को पांच दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में खाप पंचायत कोई अहम निर्णय लेगी। जिस तरह के आरोप लगे हैं, उनके तहत अभी तक भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई हो जानी चाहिए थी। इस मामले को लंबा खींचना ठीक नहीं था। पहलवान तो सबके हैं, ये किसी एक जाति या समुदाय के नहीं हैं। इन्होंने दुनिया में देश का नाम रोशन किया है।
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राकेश टिकैत कहते हैं, अभी पहलवानों के पास कई विकल्प हैं। इस बाबत भी विचार किया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय पहलवानों के मेडल, क्यों न राष्ट्रपति को सौंप दिए जाएं। जब सरकार को पहलवानों के मेडल के सम्मान की कोई परवाह ही नहीं है, तो उन्हें राष्ट्रपति को सौंपना ही उचित है। अगर इस पर सहमति नहीं बनती है, तो मेडल की वैश्विक स्तर पर बोली लगाई जा सकती है। इस तरह की बोली में तो कई देश भाग लेंगे। इससे तो अपने देश का मान-सम्मान बढ़ जाएगा। हालांकि ये दोनों बातें अभी एक विकल्प के तौर पर हैं। आगे क्या करना है, क्या नहीं, ये खाप पंचायत ही तय करेगी।