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चिंताजनक: अंटार्कटिका में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी, प्लास्टिक प्रदूषण अब दुनिया के सबसे दुर्गम हिस्सों तक

Fri, 21 Feb 2025 05:23 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 21 Feb 2025 05:23 AM IST
सार

पृथ्वी पर कोई भी स्थान प्लास्टिक कचरे के प्रभाव से अछूता नहीं रह गया है। इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने एल्सवर्थ पर्वत के निकट यूनियन और शैन्ज ग्लेशियर के अनुसंधान शिविरों और अमेरिकी अंटार्कटिक कार्यक्रम के शोध केंद्र के आसपास की बर्फ का विश्लेषण किया।

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Worrying: Presence of microplastics in Antarctica, plastic pollution now reaches the most inaccessible parts
प्लास्टिक कचरा (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के दूरस्थ इलाकों में माइक्रोप्लास्टिक के कणों की उपस्थिति के प्रमाण खोजे हैं। वैज्ञानिक इसे गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं। ये बेहद छोटे प्लास्टिक कण जिनका आकार पांच मिलीमीटर से भी कम हो सकता है, दर्शाते हैं कि प्लास्टिक प्रदूषण अब दुनिया के सबसे दुर्गम हिस्सों तक पहुंच चुका है।
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इससे यह स्पष्ट होता है कि पृथ्वी पर कोई भी स्थान प्लास्टिक कचरे के प्रभाव से अछूता नहीं रह गया है। इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने एल्सवर्थ पर्वत के निकट यूनियन और शैन्ज ग्लेशियर के अनुसंधान शिविरों और अमेरिकी अंटार्कटिक कार्यक्रम के शोध केंद्र के आसपास की बर्फ का विश्लेषण किया। इस अध्ययन के निष्कर्ष साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट नामक जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
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वैज्ञानिको का शोध
वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये माइक्रोप्लास्टिक अंटार्कटिका तक कैसे पहुंचे और यह पर्यावरण को कैसे प्रभावित कर रहे हैं। कुछ शोधों के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक बर्फ की परावर्तक क्षमता को कम कर सकते हैं जिससे बर्फ तेजी से पिघल सकती है। इसके अलावा ये कण पारिस्थितिकी तंत्र में घुलकर समुद्री जीवों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
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19 स्थानों से एकत्र किए नमूने...
एक अन्य अध्ययन में न्यूजीलैंड के कैंटरबरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में 19 स्थानों से बर्फ के नमूने इकट्ठा किए, जिनमें से सभी में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी मिली। इनमें 13 विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पाए गए, जिनमें सबसे आम पीईटी (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) था जो आमतौर पर बोतलों और पैकेजिंग में इस्तेमाल होता है। अंटार्कटिका में माइक्रोप्लास्टिक की खोज न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि जीव-जंतुओं और मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा है।


अब 100 गुना अधिक बारीक प्लास्टिक पकड़ में आएगा
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे की वैज्ञानिक डॉ. एमिली रोलैंड्स के अनुसार नई तकनीकों के माध्यम से अब पहले की तुलना में 100 गुना अधिक बारीक माइक्रो प्लास्टिक का पता लगाया जा सकता है। यह शोध इस सच्चाई को उजागर करता है कि प्लास्टिक प्रदूषण का असर अब पूरे ग्रह पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है जिससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। पहले ही पेंगुइन, सील और मछलियों में माइक्रोप्लास्टिक के प्रमाण मिल चुके हैं। हाल के अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि ये कण समुद्र में कार्बन के संचरण को बाधित कर सकते हैं।
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