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चिंताजनक : महामारी से 37.5 करोड़ बच्चों की सेहत प्रभावित, 50 करोड़ बच्चों का स्कूल छूटा
Fri, 26 Feb 2021 07:37 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 26 Feb 2021 07:37 AM IST
सार
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयरनमेंट (सीएसई) की स्टेट ऑफ इंडिया इन्वॉयरमेंट रिपोर्ट के 2021 अनुसार, कोरोना महामारी के कारण देश भर में 37.5 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य और आर्थिक हालात पर स्थायी असर पड़ा है।
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स्कूल के बच्चे
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
सीएसई की महानिदेशक डॉ. सुनीता नारायण ने रिपोर्ट जारी करते हुए बताया, नवजात से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी तकलीफें ज्यादा होंगी। इसमें बच्चों का कम वजन, उम्र के अनुसार, शारीरिक विकास न होना और मृत्यु दर में बढ़ोतरी की आशंका है।
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बच्चों की खराब सेहत के कारण शिक्षा और कार्य क्षेत्र में भी दुष्प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऑनलाइन जारी की गई इस रिपोर्ट को दुनियाभर के साथ पर्यावरण और अन्य विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है।
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बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए और घातक
रिपोर्ट के अनुसार, बीमारी, कुपोषण, अत्यंत गरीबी जैसी समस्याओं से मुश्किल होगी। हवा और पानी में प्रदूषण स्तर बढ़ने का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लॉकडाउन में भी नदियों के प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई है। सांस लेने के लिए हवा और पीने के लिए साफ पानी के लिए बहुत बड़े स्तर पर काम करना होगा।
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महाराष्ट्र का तारापुर प्रदूषित क्लस्टर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, देश के 88 प्रमुख औद्योगिक कलस्टर में से 35 में समग्र रूप से पर्यावरण में गिरावट आई है। 33 स्थानों पर हवा की गुणवत्ता खराब, 45 स्थानों पर साल भर दूषित पानी जबकि 17 स्थानों पर भूमि प्रदूषण अधिक था। महाराष्ट्र का तारापुर सबसे प्रदूषित क्लस्टर था।
महामारी से 50 करोड़ बच्चों का स्कूल छूटा
महामारी के कारण दुनिया भर में 50 करोड़ बच्चों का स्कूल छूट गया। इसमें से 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे भारत में है। सुनीता नारायण ने कहा, महामारी के कारण अतिरिक्त 115 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी के दायरे में आ चुके हैं। इसमें से अधिकतर दक्षिण एशिया में रहते हैं।
192 देशों में भारत 117वें स्थान पर
सतत विकास लक्ष्य हासिल करने में भारत दुनिया भर के 192 देशों की सूची में 117वें स्थान पर है। पाकिस्तान को छोड़कर सभी दक्षिण एशियाई देशों से पीछे हैं। सतत विकास लक्ष्यों को पाने में 5 राज्य केरल, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना बेहतर है। बिहार, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और यूपी सबसे पीछे हैं।
2025 तक स्क्रैपेज नीति की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वर्ष 2025 तक वाहनों के स्क्रैपेज के लिए नीति की जरूरत होगी। देश में दो करोड़ वाहन ऐसे हैं जिनका जीवन अंत की ओर है। अगर सही समय पर इनका निस्तारण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे। भारत में वर्ष 2019 में 16.70 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण हुई हैं।
889 जीवों पर मंडरा रहा खतरा
भारत में 430 पौधे जिसमें 95 फीसदी फूल और खाद्य पदार्थ वाले हैं। वे खात्मे की कगार पर हैं। रीढ़ और रीढ़ विहीन 889 जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरण से जुड़े आपराधिक मामले बढ़े हैं। 2019 में 24,671 केस दर्ज हुए थे जबकि 49,877 मामले लंबित हैं।