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विश्व दृष्टि दिवस : नेत्रदान करें, रोशनी की दुनिया का अंधेरा मिटाएं

Thu, 13 Oct 2016 01:02 AM IST
रबीश श्रीवास्तव/अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 13 Oct 2016 01:02 AM IST
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World Sight Day
- फोटो : demo pic

नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के तमाम प्रयास के बावजूद नेत्रदान करने वालों का आंकड़ा उत्साह बढ़ाने वाला नहीं है। नेत्रदान और कार्निया प्रत्यारोपण के वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो इसके दानदाता एक फीसदी से भी कम हैं। यही वजह है कि देश में 25 लाख लोग अभी भी दृष्टिहीनता की चपेट में हैं। देश में हर साल 80 से 90 लाख लोगों की मृत्यु होती है लेकिन नेत्रदान 25 हजार के आसपास ही होता है।

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आंख किसी व्यक्ति के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है और अगर वही नहीं है तो व्यक्ति का जीवन किसी काम का नहीं। ऐसे लोगों की मदद के लिए अधिक से अधिक नेत्रदान कराने के लिए आई बैंक और तमाम सामाजिक संस्थाओं की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। अक्तूबर के दूसरे बृहस्पतिवार को हर साल विश्व दृष्टि दिवस भी मनाया जाता है। इसका मकसद आंखों की बीमारियों और समस्याओं को लेकर लोगों को जागरूक करना है। 

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एक व्यक्ति दे सकता है चार लोगों को रोशनी

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सांकेतिक चित्र - फोटो : getty images

हाल ही में बनारस में आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वार्षिक सम्मेलन में जुटे देश भर के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने 2020 तक कार्निया की जरूरत के इस अंतर को कम करने का संकल्प लिया लेकिन नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता की कमी को लेकर उनकी चिंता झलकी। लायंस आई बैंक के निदेशक डॉ. अनुराग टंडन कहते हैं कि रक्तदान की तरह ही नेत्रदान के लिए जागरूकता बढ़ाकर ही दृष्टिहीनों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।

मृत्यु के बाद एक व्यक्ति चार लोगों को रोशनी दे सकता है। पहले दोनों आंखों से केवल दो ही कार्निया मिलती थी लेकिन अब नई तकनीक आने के बाद से एक आंख से दो कार्निया प्रत्यारोपित की जा रही हैं। डीमैक तकनीक से होने वाला यह प्रत्यारोपण शुरू हो गया है। खास बात यह है कि व्यक्ति के मरने पर उसकी पूरी आंख नहीं बदली जाती है केवल रोशनी वाली काली पुतली ही ली जाती है। दोनों कार्निया एक साथ नहीं बदली जाती है। मौत के छह घंटे तक ही कार्निया प्रयोग लायक रहती हैं।

आईबैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जोनल अध्यक्ष डॉ. हेमंत कुमार ने कहा कि देश में अभी 25 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें कार्निया की जरूरत है। अगर उन्हें समय से कार्निया मिल जाए तो वे दुनिया का हर रंग देख पाएंगे।

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