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दुनिया के सबसे बडे़ सैन्य कार्गो विमान 'C-130' ने 64 साल पहले आज के दिन भरी थी पहली उड़ान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Thu, 23 Aug 2018 10:29 AM IST
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सी-130
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एयरक्राफ्ट की दुनिया में आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि 1954 में आज ही के दिन अमेरिकी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट द लॉकहीड सी-130 हरक्यूलस ने अपनी पहली उड़ान भरी थी। इस चार इंजन वाले मालवाहक विमान को लॉकहीड कंपनी (अब लॉकहीड मार्टिन) ने बनाया था। सी-130 जे, लॉकहीड सी-130 हरक्यूलस के नए इंजन, फ्लाइट डेक और अन्य प्रणालियों के साथ अपडेट वर्जन है।
इतिहास में किसी भी अन्य सैन्य विमान की तुलना में सबसे लंबा निरंतर उत्पादन हरक्यूलस परिवार के विमानों का रहा है। 64 साल की सर्विस के दौरान इस विमान ने सैन्य, नागरिक और मानवीय सहायता अभियान में भाग लिया है। भारत समेत 20 से अधिक देश इस विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। खास 2008 में भारत ने 1.1 बिलियन डॉलर में अमेरिका से छह सी-130 जे विमान खरीदे थे। केरल बाढ़ में यह विमान रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभा रहा है।
हरक्यूलिस सी-130जे में ग्लास कॉकपिट सी-130 जे में दो पायलट और एक लोडमास्टर का क्रू होता है। इसका नया ग्लास कॉकपिट चार एल-3 डिस्प्ले सिस्टम्स, फ्लाइट कंट्रोल के लिए मल्टीफंक्शन लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले और नेविगेशन सिस्टम से लैस है।
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इतिहास में किसी भी अन्य सैन्य विमान की तुलना में सबसे लंबा निरंतर उत्पादन हरक्यूलस परिवार के विमानों का रहा है। 64 साल की सर्विस के दौरान इस विमान ने सैन्य, नागरिक और मानवीय सहायता अभियान में भाग लिया है। भारत समेत 20 से अधिक देश इस विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। खास 2008 में भारत ने 1.1 बिलियन डॉलर में अमेरिका से छह सी-130 जे विमान खरीदे थे। केरल बाढ़ में यह विमान रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभा रहा है।
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हरक्यूलिस सी-130जे में ग्लास कॉकपिट सी-130 जे में दो पायलट और एक लोडमास्टर का क्रू होता है। इसका नया ग्लास कॉकपिट चार एल-3 डिस्प्ले सिस्टम्स, फ्लाइट कंट्रोल के लिए मल्टीफंक्शन लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले और नेविगेशन सिस्टम से लैस है।
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भारतीय सी-130
कार्गों ट्रांसपोर्ट में सबसे आगे हरक्यूलिस सी-130जे में 4,500 फिट से भी ज्यादा का कार्गो ट्रांसपोर्ट करने की ताकत है। इसमें पूरी तरह हथियारों से लैस तीन कैरियर्स, पांच बॉक्स, 92 इक्विप्ड कॉम्बेट ट्रुप्स, या फिर 64 पैराट्रूपर्स को आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
युद्ध में भी ताकतवार हरक्यूलिस सी-130जे इसमें मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम के अलावा इलेक्ट्रो ऑप्टि सेंसर्स भी मौजूद हैं जो किसी भी मिसाइल को डिटेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें एडवांस्ड सिग्नल प्रोसेसिंग और किसी भी खतरे को पहले ही भांप लेने के लिए भी सिस्टम मौजूद हैं। रडार वॉर्निंग रिसीवर भी इसे काफी ताकतवर बनाते हैं। इसमें दी गई वेदर रडार की रेंज 250 मीटर है।
रफ्तार का शहंशाह हरक्यूलिस सी130जे सी-130 जे 20,000 फीट की ऊंचाई पर 320 नॉटस सानी 592 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसकी रेंज 3332 किमी तक की है।
हरक्यूलिस सी130जे का वर्ल्ड रिकॉर्ड हरक्यूलिस ने पांच अप्रैल 1996 से अपनी पहली उड़ान के साथ 30 अप्रैल 2013 तक 13 अलग-अलग देशों से उड़ान भरी और इसके साथ ही इसने एक मिलियन फ्लाइट ऑवर्स का रिकॉर्ड दर्ज किया। इसके अलावा इसके नाम पर 54 अलग-अलग रिकॉर्ड दर्ज हैं।
युद्ध में भी ताकतवार हरक्यूलिस सी-130जे इसमें मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम के अलावा इलेक्ट्रो ऑप्टि सेंसर्स भी मौजूद हैं जो किसी भी मिसाइल को डिटेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें एडवांस्ड सिग्नल प्रोसेसिंग और किसी भी खतरे को पहले ही भांप लेने के लिए भी सिस्टम मौजूद हैं। रडार वॉर्निंग रिसीवर भी इसे काफी ताकतवर बनाते हैं। इसमें दी गई वेदर रडार की रेंज 250 मीटर है।
रफ्तार का शहंशाह हरक्यूलिस सी130जे सी-130 जे 20,000 फीट की ऊंचाई पर 320 नॉटस सानी 592 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसकी रेंज 3332 किमी तक की है।
हरक्यूलिस सी130जे का वर्ल्ड रिकॉर्ड हरक्यूलिस ने पांच अप्रैल 1996 से अपनी पहली उड़ान के साथ 30 अप्रैल 2013 तक 13 अलग-अलग देशों से उड़ान भरी और इसके साथ ही इसने एक मिलियन फ्लाइट ऑवर्स का रिकॉर्ड दर्ज किया। इसके अलावा इसके नाम पर 54 अलग-अलग रिकॉर्ड दर्ज हैं।