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World Milk Day 2021: उत्पादन में भारत सबसे आगे, फिर सवालों के घेरे में क्यों दूध की गुणवत्ता?

Tue, 01 Jun 2021 01:18 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Tue, 01 Jun 2021 01:18 PM IST
सार

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। साल 2018-19 में भारत में 188 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया था, जबकि 2019-20 में 198 टन दूध का उत्पादन हुआ। हालांकि, कोरोना काल का असर डेयरी सेक्टर पर भी पड़ा, जिसके चलते वित्तीय वर्ष 2020-21 में उत्पादन में काफी गिरावट दर्ज की गई।

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World Milk Day 2021 India at the forefront of milk production why the quality of milk is poor
विश्व दुग्ध दिवस 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जरूरत दही, पनीर और मावा की हो या मुंह मीठा करने के लिए बर्फी-पेड़ा चाहिए। बस आपको सिर्फ दूध खरीदना है और ये सभी चीजें झट से तैयार हो जाती हैं। अब अगर आप सोच रहे हैं कि हम आपको यह सब क्यों बता रहे हैं तो जान लीजिए कि आज विश्व दुग्ध दिवस यानी वर्ल्ड मिल्क डे है। बता दें कि दूध को सफेद सोना भी कहा जाता है, क्योंकि इसे संपूर्ण आहार का दर्जा मिला हुआ है। इस रिपोर्ट में हम आपको बताते हैं कि दुग्ध दिवस की शुरुआत कैसे हुई? इसका मकसद क्या है और जब आप अपने पसंदीदा मिल्क प्रोडक्ट्स को चुनते हैं तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

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कितने तरह का दूध होता है इस्तेमाल?

World Milk Day 2021 India at the forefront of milk production why the quality of milk is poor
World Milk Day - फोटो : iStock

बता दें कि अब तक लोग गाय, भैंस और बकरी आदि जानवरों के दूध पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वैकल्पिक दूध का सेवन भी काफी बढ़ गया है। अब लोग सोयाबीन के दूध, नारियल के दूध, जई के दूध और भांग के दूध का भी सेवन करने लगे हैं। बाजार में भी पौधों से निकलने वाले दूध की डिमांड काफी बढ़ चुकी है। इसे वीगन मिल्क कहा जाता है। इसके अलावा पैकेट वाला दूध और टेट्रा पैक वाला दूध भी इस वक्त ट्रेंड में है। 

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इस वजह से दूध के विकल्प में आया बदलाव

World Milk Day 2021 India at the forefront of milk production why the quality of milk is poor
World Milk Day - फोटो : iStock

जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग पौधों या बादाम के दूध को जानवरों के अधिकारों का हवाला देते हुए इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, काफी आबादी ऐसी भी है, जो दूध में मौजूद शुगर लैक्टोज पचा नहीं पाती, जिसके चलते वे लोग पौधों या बादाम के दूध को वरीयता देते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सामान्य दूध की तरह क्या इस दूध में भी तमाम पोषक तत्व मौजूद होते हैं? अगर कोई शख्स अपने लिए दूध से बने उत्पादों का चुनाव कर रहा है तो उसे किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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दूध की गुणवत्ता को लेकर बढ़ रही चिंता

जब आप अपने पसंदीदा दूध के उत्पाद चुनते हैं तो क्या आपने कभी सोचा है वह आपकी और आपके परिवार की सेहत के लिए कितना फायदेमंद है? क्या वह पौष्टिक और सुरक्षित है? अहम बात यह है कि भारत में जागरूकता की कमी के चलते सुरक्षित भोजन मिलना सबसे बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। साल 2018-19 में भारत में 188 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया था, जबकि 2019-20 में 198 टन दूध का उत्पादन हुआ। हालांकि, कोरोना काल का असर डेयरी सेक्टर पर भी पड़ा, जिसके चलते वित्तीय वर्ष 2020-21 में उत्पादन में काफी गिरावट दर्ज की गई। बता दें कि 2020-21 के लिए यह आंकड़ा 208 मिलियन टन तय किया गया था। गौरतलब है कि देश में जितनी तेजी से डेयरी उत्पादों की खपत में इजाफा हुआ, उतनी ही तेजी से दूध की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है। 

क्या अच्छा होता है पैकेट वाला दूध?

गौरतलब है कि खुले दूध और उससे संबंधित प्रोडक्ट्स में मिलावट के तमाम मामले सामने आ चुके हैं। दरअसल, भारत में दुग्ध उत्पादन में स्वच्छता के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया जाता। वहीं, कीटाणुओं और जीवाणुओं के कारण 68.5% दूषित दूध की आपूर्ति होती है। बता दें कि भारत में 80 फीसदी से ज्यादा तरल दूध की खपत होती है, लेकिन इसके प्रसंस्करण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। इस तरह की आपूर्ति श्रृंखला अक्षमताओं को स्पष्ट रूप से प्रभावित करती है, जहां उत्पादित दूध का एक बड़ा हिस्सा स्वच्छता के बुनियादी मानकों का पालन ही नहीं करता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पैकेट वाला और वैकल्पिक दूध भी सुरक्षित होता है? ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर जोसेफ पूर इस मसले पर एक रिसर्च कर चुके हैं, जो 2018 में प्रकाशित हुई थी। हालांकि, यह रिसर्च डेयरी मिल्क और वीगन मिल्क पर आधारित थी। इसमें बताया गया था कि नॉन डेयरी मिल्क गाय के दूध से ज्यादा फायदेमंद होता है। दरअसल, गाय का दूध हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर जमीन और चारे का इंतजाम करना पड़ता है। वहीं, इसमें कार्बन उत्सर्जन भी काफी तादाद में होता है, जो वातावरण के लिए घातक है। अब बात करते हैं पैकेट वाले दूध की। दरअसल, पैकेट वाला दूध बहुत ज्यादा उच्च तापमान पर पैक किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस्तेमाल से पहले उसे उबालने की जरूरत नहीं होती। उच्च तापमान पर तैयार दूध में पोषक तत्वों को बचाते हुए बैक्टीरिया नष्ट किया जाता है। ऐसे में विशेषज्ञ पैकेट वाले दूध को काफी हद तक सुरक्षित बताते हैं।

कब तक सुरक्षित रहता है टेट्रा पैक वाला दूध?

दूध की क्वॉलिटी को लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल रहते हैं। कई लोग पैकेट वाले दूध या टेट्रा पैक को काफी बेहतर बताते हैं। दरअसल, बाजार में अमूल, नंदिनी, नेस्ले ए+, केवेंटर, मदर डेयरी आदि कंपनियों के टेट्रा पैक मौजूद हैं। लोग जानना चाहते हैं कि इन पैकेट में दूध कब तक सुरक्षित रहता है? विशेषज्ञ बताते हैं कि टेट्रा पैक में दूध तब तक सुरक्षित रहता है, जब तक उन्हें खोला नहीं जाता। उच्च तापमान पर कार्टन में पैक किया गया दूध करीब 6 महीने तक सुरक्षित रह सकता है। हालांकि, एक बार पैकेट खोलने के बाद इसे ज्यादा दिन तक रखा नहीं जा सकता। 

अलग-अलग दूध में कार्बन उत्सर्जन कितना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, गाय या भैंस से दूध लेने पर 3.2 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन होता है। वहीं, जई के पौधे से एक लीटर दूध निकालने के लिए सिर्फ 0.9 किलोग्राम कार्बन वातावरण में मिलता है। वहीं, चावल से 1.2 किलोग्राम और सोया से एक किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके अलावा पानी की खपत भी कम होती है। दरअसल, डेयरी का एक लीटर दूध उत्पादन करने के लिए 628 लीटर पानी की जरूरत होती है। वहीं, वैकल्पिक दूध निकालने में सबसे ज्यादा 371 लीटर पानी बादाम से एक लीटर दूध निकालने में खर्च होता है। गौरतलब है कि सामान्य दूध के साथ-साथ लोगों का रुख वैकल्पिक दूध की तरफ भी होने लगा है। हालांकि, ऐसे लोगों की संख्या फिलहाल काफी कम है।

भारत में कब मनाया जाता है यह दिवस?

गौरतलब है कि आम लोगों के आहार में दूध के महत्व के बारे में बताने के लिए भारत में भी दूध दिवस मनाया जाता है। भारत में श्वेत क्रांति की शुरुआत दूध को बढ़ावा देने के लिए ही की गई थी। इसका श्रेय वर्गीज कुरियन को दिया जाता है, जिनका जन्म 26 नवंबर को हुआ था। इसके चलते भारत में उनके जन्मदिन यानी 26 नवंबर को दूध दिवस मनाया जाता है। दरअसल, वर्गीज कुरियन को भारत का 'मिल्क मैन' भी कहा जाता है।

दुग्ध दिवस 2021 की यह है थीम

बता दें कि हर साल एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने साल 2001 में की थी। इस दिन का मकसद प्राकृतिक दूध के सभी पहलुओं के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही, लोगों को यह बताना होता है कि दूध उनके जीवन में कितनी अहमियत रखता है। इसके अलावा डेयरी या दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में स्थिरता, आजीविका और आर्थिक विकास में योगदान देना है। वहीं, दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देना है। गौरतलब है कि हर साल दुग्ध दिवस की थीम तय की जाती है, जिसका मकसद दूध तक लोगों की पहुंच आसान बनाना होता है। हालांकि, अलग-अलग देशों में यह थीम अलग होती है। इस साल विश्व दुग्ध दिवस की थीम पर्यावरण, पोषणा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र में स्थिरता है। 

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