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प्लास्टिक प्रलय: नमक, मछली से लेकर झीलों और समुद्र तटों में घुल रहा Plastic, यह पर्यावरण से हम तक पहुंच रहा
Mon, 05 Jun 2023 06:11 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 05 Jun 2023 06:11 AM IST
सार
प्लास्टिक की खपत कम करने से माइक्रोप्लास्टिक को कम किया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि उद्योग और आम लोगों को भी मिलकर काम करना होगा। लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर पहल करनी चाहिए, जैसे सिंगल यूज प्लास्टिक, बोतलबंद पानी और प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग न करें।
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plastic pollution
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जिस प्लास्टिक के बिना हम अपने चारों ओर नजर आने वाली कई चीजों की कल्पना भी नहीं कर सकते, वही आज हमारे लिए जहर बन चुका है। यह हवा, पानी, मिट्टी में तेजी से घुल रहा है और यहीं से हमारे शरीर में दाखिल हो रहा है। इसे रोकने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस को इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने 'प्लास्टिक प्रदूषण के लिए समाधान' तलाशने की थीम दी है।
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माइक्रोप्लास्टिक से बिगड़ते हालात पर भारत में इस साल हुए अध्ययनों पर अमर उजाला ने भी नजर डाली और तैयार की यह विशेष रिपोर्ट, जो देश की प्राकृतिक संपदा से लेकर भोजन व हमारे शरीर तक में घुलते प्लास्टिक की कहानी समझाती है।
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20 किलो प्लास्टिक कचरा पैदा किया एक भारतीय ने साल 2022 में
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कहता है कि देश के कुल कचरे में प्लास्टिक 8 प्रतिशत है। यह आंकड़ा कम लग सकता है, लेकिन जब पता चलता है कि इसकी मात्रा लगातार बढ़ रही है और यह सैकड़ों वर्षों तक वातावरण में बना रहता है, तो छोटी मात्रा के बड़े नुकसान हमें समझ आते हैं।
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प्लास्टिक से वातावरण को बचाने के लिए इसे रिसाइकल करने और उपयोग घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1 टन प्लास्टिक से करीब 3.8 बैरल पेट्रोलियम भी बन सकता है। सड़कों से लेकर कपड़े बनाने में भी प्लास्टिक काम आने लगा है।
4.3% हिस्सा अकेले पैकिंग में उपयोग हो रहा है प्लास्टिक का देश में। इस पैकिंग का उपयोग भी एक बार ही होता है।