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चिंताजनक : कोरोना संक्रमण से मधुमेह रोगियों की जान का जोखिम चार गुना तक बढ़ा, जानिए क्यों

Sun, 14 Nov 2021 05:53 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 14 Nov 2021 05:53 AM IST
सार

जीबी पंत अस्पताल के डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि कोरोना का खतरा भी मधुमेह रोगियों में ही सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। कोविड के जिन मरीजों में लक्षण गंभीर थे, उनमें से ज्यादा टाइप-2 मधुमेह के क्रोनिक रोगी हैं।

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World Diabetes Day Worrying: Coronavirus infection increases the risk of life of diabetics up to four times, know why
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock/Pixabay

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच वायु प्रदूषण और मौसमी बीमारियों के चलते इस समय हर तरह की संक्रामक बीमारी चरम पर है। अस्पतालों में कोरोना के अलावा डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस, मौसमी बुखार, पोस्ट कोविड इत्यादि के मरीज देखने को मिल रहे हैं। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

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रविवार को दिल्ली सहित पूरे देश और विश्व में मनाए जाने वाले मधुमेह दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि संक्रामक बीमारियों ने मधुमेह रोगियों की जान का जोखिम चार गुना बढ़ा दिया है। यह बीमारी कोरोना महामारी से भी घातक है। इसलिए मधुमेह रोगियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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7 करोड़ से ज्यादा लोग चपेट में : डॉ. अग्रवाल
जीबी पंत अस्पताल के डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि कोरोना का खतरा भी मधुमेह रोगियों में ही सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। कोविड के जिन मरीजों में लक्षण गंभीर थे, उनमें से ज्यादा टाइप-2 मधुमेह के क्रोनिक रोगी हैं। इनमें अधिकतर की उम्र 28 से 60 वर्ष की बीच है। साइलेंट किलर कहलाने वाली यह बीमारी सबसे आम गैर-संचारी रोग है जो अब तक देश की सात करोड़ से भी ज्यादा आबादी को अपनी चपेट में ले चुकी है। 
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डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मधुमेह मरीजों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, सांस लेने में परेशानी, मतली, भ्रम आदि लक्षण दिखाई देते हैं। अपोलो अस्पताल के डॉ. निखिल मोदी का कहना है कि यह मेटाबॉलिक रोग कई अंगों को प्रभावित करता है और कोविड के साथ लक्षण घातक हो सकते हैं।

30 फीसदी आबादी चपेट में : डॉ. मित्तल
नांगलोई स्थित उजाला सिग्नस अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. महेंद्र मित्तल का कहना है कि दिल्ली में लगभग 30 फीसदी आबादी मधुमेह की चपेट में है और इतनी ही आबादी आगामी दिनों में इस बीमारी का शिकार हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत मधुमेह की राजधानी बन चुकी है। 

आधुनिक जीवनशैली के चलते लोग तेजी से इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। अगर सही मायने में देखें तो यह कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है। ऐसी स्थिति में लोगों को अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है। हर दिन व्यायाम और भोजन पर अधिक ध्यान दें। रोज 3 से 4 किमी टहलना जरूरी है अगर प्रदूषण है तो घर में व्यायाम करें।


महानगरों में सबसे अधिक दिल्ली में : एसोचैम
एसोचैम की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के महानगरों में सबसे अधिक मधुमेह रोगी दिल्ली में हैं। यहां करीब 42 फीसदी आबादी इस बीमारी का शिकार हो चुकी है। जबकि मुंबई में 38.5, अहमदाबाद में 36, बेंगलूरू में 26.5 और चेन्नई में 24.5 फीसदी आबादी मधुमेह ग्रस्त है। चूंकि दिल्ली में इस समय वायु प्रदूषण भी पूरे देश में सबसे अधिक है। इसलिए यहां लोगों को और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

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