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विश्व बाल दिवस विशेष: भारत के 96 फीसदी बच्चे बाल हिंसा से चिंतित, मौका मिला तो दुनिया बदलेंगे

Mon, 20 Nov 2017 05:42 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Mon, 20 Nov 2017 05:42 PM IST
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World Childrens Day Indian children worried about violence says UNICEF survey
unicef
विश्व में बढ़ती हिंसा, स्वास्थ्य और असुरक्षा की भावना से दुनियाभर के अधिकतर बच्चों का सबसे बड़ा डर है। इन बच्चों का ये मानना है कि जिस तरह से विश्वभर में बच्चों के प्रति हिंसा बढ़ रही है और गरीब बच्चे शिक्षा से महरूम है अगर उन्हें कभी मौका मिला और अगर वो नेता बनते हैं तो वो पूरी दुनिया में बदलाव ला देंगे। बच्चे कहते हैं कि अगर वो नेता बने तो-
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- सबको भोजन, घर, शिक्षा और बराबरी का एहसास कराएंगे।
- बाल हिंसा की रोकथाम के साथ दुनियाभर में लड़कियों को एक सुरक्षित समाज देंगे।
- लड़के-लड़कियों में भेद-भाव को खत्म करते हुए दोनों को एक जैसे मौके मुहैया कराएंगे।
- हर बच्चे को मुफ्त शिक्षा और अपने हिसाब से जीने का अधिकार भी देंगे।
ये सोच है विश्व को करीब 12000 से अधिक बच्चों की। और ये बातें सामने आ पाईं है यूनिसेफ एक सर्वे से जो उन्होंने हाल ही में १३ देशों के बच्चों पर ऑनलाइन सवाल जबाव कर तैयार किया है। इसमें भारत के 1000 बच्चे भी शामिल हैं।
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World Childrens Day Indian children worried about violence says UNICEF survey
यूनिसेफ - फोटो : UNICEF

विश्व के हर देश में आज बचपन असुरक्षित है। इस असुरक्षित बचपन को देखते हुए बच्चे ही दुनिया में बड़ा बदलाव चाहते हैं। बच्चों की इस सोच और धारणा का खुलासा हुआ है बच्चों के अधिकारों के लिए 70 से अधिक वर्षों से काम कर रही संस्था यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट से। रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि बच्चा भारत का हो अमेरिका का या फिर इजिप्ट का आतंकवाद, नेचुरल डिसास्टर, बाल हिंसा उनके डर का सबसे बड़ा कारण है।

 
यूनिसेफ ने भारत में भी 1000 बच्चों से ऑनलाइन सर्वे में कुछ सवाल किए, जिसमें 96 फीसदी बच्चे बच्चों के साथ बढ़ती बाल हिंसा से परेशान और चिंतित मिले। सर्वेे 9 से १८ साल के बच्चों पर किया गया जिसमें लड़कियां भी शामिल थीं। यूनिसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व भर के बच्चे तीन चीजों से बहुत डरे हुए हैं और उनका मानना है कि ये डर उनके व्यक्तित्व के विकास में बहुत बड़ी बाधा है।
 
सर्वे में 75 फीसदी बच्चे प्रदूषण और पर्यावरण में हो रहे तेजी से बदलाव को बड़ा डर मानते हैं जबकि 56 फीसदी बच्चों को  प्राकृतिक आपदा से डर लगता है वहीं 54 फीसदी बच्चे देश की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर काफी चिंतित नजर आए। सर्वे में हुए चौंकाने वाले खुलासे ये बताते हैं कि विश्वभर के बच्चे अपनी शिक्षा ही नहीं बल्कि क्लाइमेट चेंज,नेचुरल डिसास्टर सहित स्वास्थ और आतंकवाद के साथ साथ देश की बिगड़ती स्थिति और बाल हिंसा भी इन बच्चों के लिए चिंता का विषय है।

World Childrens Day Indian children worried about violence says UNICEF survey
यूनिसेफ के कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर
​यूनिसेफ ने 13 से अधिक देशों के बच्चों के साथ ऑनलाइन सर्वे किया है। जिसमें ब्राजील, इजिप्ट, मलेशिया, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, दक्षिण अमेरिका, नीदरलैंड सहित यूके और यूएस जैसे देश भी शामिल किए गए।

9 से 18 साल के बच्चों पर किए गए इस सर्वे में पता चला कि 96 फीसदी बच्चे बढ़ती बाल हिंसा को लेकर चिंतित हैं। जिसमें 51 फीसदी 9-12 साल के बच्चे कभी न कभी खुद बाल हिंसा के शिकार होने के डर से डरे हुए हैं। वहीं आतंकवाद, बॉंब बलास्ट और इन हमलों से मरने वालों की वजह से 95 परसेंट बच्चे चिंतित मिले। इनमें 48 फीसदी वो बच्चों ने ये चिंता जाहिर की कि आतंकवाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभावित कर सकता है और वो उस बात को लेकर चिंतित भी हैं।

जब सर्वे में इन बच्चों से पूछा गया कि क्या आतंकवाद पर विश्व के नेता कुछ कर सकते हैं तो 24 फीसदी से अधिक बच्चों ने माना कि अगर ताकतवर नेता चाहें तो विश्व से आतंकवाद खत्म हो सकता है और उन्हें एकजुट होकर इस ओर ध्यान देना चाहिए।

इन बच्चों से ये भी पूछा गया कि वो अपने जन्मदिन पर किसे बुलाना चाहते हैं तो 15 फीसदी बच्चे अमिताभ बच्चन और 14 फीसदी बच्चों ने नरेंद्र मोदी का नाम लिया।वहीं कुछ बच्चों ने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक अब्दुल कलाम  को भी याद किया।

20 नवंबर यानि आज पूरी दुनिया विश्व बाल दिवस मना रहा है। यूनिसेफ ने करीब 13 देशों के 12 हजार बच्चों से पसंद नापसंद को लेकर सर्वे कराया गया। बच्चों से पूछा गया कि उनकी सबसे ज्यादा हौसलाअफजाई कौन करता है। जवाब में 96% बच्चों ने परिवार का, तो 95% ने दोस्तों का नाम लिया। इस सर्वे में बच्चों से बर्थ डे के अलावा कई सवाल किए गए।

कुछ सवाल जबाव

अगर आपको सुपर पावर मिल जाए तो-
जबाव - पॉल्यूशन हटाएंगे, ये हमारे जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। खूब सारे प्लेग्राउंड तैयार करेंगे।

गरीबों और गरीब परिवारों की मदद करेंगे?
दुनिया से गंदगी का नामों निशान मिटा देंगे। दुनिया को हरा भरा बनाने की इच्छा खूब दिखी। चूंकि दुनिया तकनीकी की तरफ भाग रही है और बच्चे भी खबरों की दुनिया से खूब जुड़े दिखे।

जानकारी हासिल करने के लिए आजकल बच्चों में ऑनलाइन मीडिया का चलन तेजी से बढ़ा है क्योंकि 82 फीसदी बच्चों के हाथ में स्मार्ट फोन है। वहीं 68 फीसदी बच्चों के पास अपना लैपटॉप और 53 फीसदी बच्चे डेस्कटॉप का इस्तेमाल कर सूचना जुटा रहे हैं।

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